क्या हुआ

इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) ने स्पोर्टिंग लैंडस्केप पर अपनी छाया डाल दी, लेकिन एक नॉन-क्रिकेट स्पोर्ट फंडिंग क्राइसिस नीचे सurface पर unfold हो रहा है, जिसमें कई एथलीट्स और स्पोर्ट्स ऑर्गनाइज़ेशन्स को अपने पास में सिर्फ सुरवार कर पाने में संघर्ष कर रहे हैं। इस स्थिति ने 2022-23 बजट में नॉन-क्रिकेट स्पोर्ट्स के लिए आवंटित धन को नाटकीय रूप से कम करने के बाद क्रिटिकल स्थिति बन गई, जिसके परिणामस्वरूप नॉन-क्रिकेट स्पोर्ट्स के लिए nearly 40% की कटौती हुई।

खेल फंडिंग संकट: क्रिकेट के अलावा कोई नॉन-क्रिकेट गेम Survival की संभावना है?

केंद्रीय समर्थन पर अधिक निर्भर करते हुए, खिलाड़ियों और संगठनों को फंडिंग की कमी ने प्रभावित किया है। उदाहरण के लिए, अखिल भारतीय फुटबॉल संघ (AIFF) ने अपने वार्षिक अनुदान में INR 120 करोड़ से घटकर INR 70 करोड़ तक हो गया, जिससे उनकी राष्ट्रीय टीमों का रखरखाव करना मुश्किल हो गया।

हम नॉन-क्रिकेट खेलों के भविष्य को लेकर बहुत चिंतित हैं, कहा डॉ. गोपालकृष्णन श्रीनिवासन, एक प्रमुख स्पोर्ट्स मैनेजमेंट एक्सपर्ट। "फंडिंग की कमी सिर्फ एथलीटों पर ही नहीं पड़ेगी, बल्कि पूरे इकोसिस्टम को भी प्रभावित करेगी, जिसमें कोच, ट्रेनर और इमेंट प्रोवайдर शामिल हैं।"

क्या मायने रखता है

क्रिकेट से बाहर किसी खेल का स存 हो पाएगा?

क्राइसिस के प्रभाव बहुत व्यापक हैं, कई एथलीटों को हिस्सेदारी नौकरियां लेनी पड़ती हैं या अपने खेलने के सपने छोड़ने को मजबूर होना पड़ता है। सरकार की सहायता में कमी ने भी अन्य खेलों के लिए सुविधाओं और संस्थानों का विकास घट जाता है, जिससे उभरने वाले एथलीटों के लिए और अधिक चुनौतियां आती हैं।

खेल के नॉन-क्रिकेट स्पोर्ट्स में निवेश की कमी लंबी अवधि के परिणाम देगी

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने, एक प्रतिष्ठित खेल सोशियोलॉजिस्ट, चेतावनी दी। "हम एक सामान्य स्तर में गिरावट देख रहे हैं, जिसका अंतिम परिणाम भारतीय टीमों की इंटरनेशनल प्रतियोगिताओं में प्रदर्शन पर पड़ेगा।"

English:

"Any non-cricket game will struggle to survive without adequate funding," said Rohan Chakravarty, a renowned sports cartoonist. "The current situation is unsustainable and will lead to a decline in the overall standard of play."

Hindi:

किसी नॉन-क्रिकेट खेल के लिए सufficient फันดिंग के बिना जीवित होना मुश्किल होगा

रोहन चक्रवार्थी, एक प्रतिष्ठित खेल कार्टूनिस्ट, ने कहा। "वर्तमान स्थिति असustainability है और सामान्य स्तर में गिरावट का नेतृत्व करेगी।"

क्राइसिस का सामान्य लोगों पर प्रभाव

क्राइसिस ने लोगों को अपने पसंदीदा न-क्रिकेट खेल या स्थानीय एथलीट्स का समर्थन नहीं करने दिया जिन्होंने अपने जीवन को खेल में समर्पित कर दिया है। इसी क्राइसिस ने एथलीट्स और फैन्स दोनों में एक भावना से विमोहित किया है, इससे सरकार को अपने पRIORITYs को रिव्यू करना चाहिए और न-क्रिकेट खेलों के विकास में निवेश करे।

विशेषज्ञ की दृष्टि

क्रिकेट से अलावा खेलों की फाइनेंसिंग संकट में गहराया है, विशेषज्ञ इसके प्रभाव पर बंटे हुए हैं। मुंबई विश्वविद्यालय के खेल प्रबंधन विशेषज्ञ डॉ. रोहन फर्नांडिस को भविष्य के लिए उम्मीद है। "आईपीएल की भारी प्रतिभा और आय का उपयोग ठीक से यदि किया जाए, तो अन्य खेलों के लिए नई संभावनाएं बना सकती हैं, athlete और संगठन सभी शाखाओं में," उसने कहा। "आईपीएल की संसाधनों का उपयोग यदि सही तरीके से किया जाए, तो खेलकार्य कराने वाले और संगठनों के लिए नई अवसर बना सकते हैं."

क्रिकेट से अलावा किसी खेल की जीविका बचने की उम्मीद है?

किन्तु डॉ॰ कविता शर्मा, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में खेलों की सामाजिक शास्त्री हैं, उन्हें इससे अधिक सावधानी है. "आईपीएल ने नौकरियां और आय पैदा कर दी, लेकिन खेलों पर उसका कब्जा और फंडिंग का संकुचन अन्य खेलों को साँस लेने नहीं देता," उन्होंने चेतावनी दी. "सरकारी समर्थन और निजी निवेश की कमी अलावा क्रिकेट खेलों में होगी, इससे संकट को और गंभीर बनाएगा."

अगला कदम

जब स्थिति फैलती है, तो कई महत्वपूर्ण तिथियाँ देखने के लिए हैं, जैसे:

भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) की जून में होने वाली बैठक, जहाँ 2024 पेरिस ओलंपिक के लिए फंडिंग निर्णय लिए जाएंगे।

राष्ट्रीय खेलों का अक्टूबर में होने वाला आयोजन, जो नॉन-क्रिकेट खेलों की पुनरुत्थान योजनाओं का परीक्षण स्थल बन सकता है।

खेल के फंडिंग संकट: क्रिकेट के अलावा कोई गेम संस्थान survives क्या प्रतीत होता है?

आने वाले सप्ताहों में सरकार पर अधिक दबाव उम्मीद है कि वह हस्तक्षेप करे और सहायता प्रदान करे। जबकि क्रिकेट से अलावा कुछ खेल संस्थाएं संघर्ष से जूझ रही हैं, दूसरे लोग नोवेटिव तरीकों से survive करने की कोशिश कर रहे हैं, जैसे क्राउडफंडिंग और ग्रासरूट योजनाएं।

क्रिकेट से अलावा खेलों की फंडिंग संकट अधिक है एक रोग के लक्षण के बजाय - यह भारतीय खेल प्रणाली के लिए एक जागरूकता का संदेश है। हम आगे देखते हैं, इसके लिए नीति निर्माताओं को विविध खेल पृष्ठभूमि के मूल्य को पहचान लेना चाहिए और स्पष्ट कदम उठाने चाहिए। क्रिकेट से अलावा खेलों की किस्मत बैलेंस में है, और समय ही बताएगा कि वे आईपीएल के आर्थिक हमले से क्या बच सकते हैं।

क्रिकेट से बाहर भारतीय एथलीटों को समान मैदान प्रदान करने के लिए एक प्रभावी उत्तर आवश्यक है।

क्रिकेट से अलावा खेलों के फंडिंग के लिए समय सीमा टिकती है – अब कार्रवाई का समय है।

English:

The funding crisis for non-cricket sports is a matter of concern.

The Indian Olympic Association (IOA) must take immediate action to address the issue.

Hindi: