क्या हुआ

भारतीय यात्रियों ने ऑनलाइन अधिक व्यक्तिगत अनुभव चाहा, एक नई लहर स्टार्टअप्स ने उद्योग को पुनर्जीवित कर दिया है, जिसमें हाइपर-प्रतिपादन, टेक्नोलॉजी-संचालित समाधान और गहरी स्थानिक अवमुक्ति शामिल है। annually 50 मिलियन से अधिक लोग विदेश यात्रा कर रहे हैं, भारत को दुनिया के सबसे बड़े यात्रा बाजारों में से एक बनने की स्थिति में है। उन लोगों के लिए जिनके पास अनूठे साहसिक हैं, Voyaah, एक भारतीय स्टार्टअप, "यात्रा" के स्वयं के अवधारणा को पुनर्परिभाषित कर रहा है।

वояह की शुरुआत

वояह, जिसका संस्कृत में अर्थ "यात्रा" है, २०१८ में उद्यमी और यात्रा प्रेमी, ऋषभ जैन द्वारा स्थापित गया। प्लेटफॉर्म ने तब तक की गति प्राप्त कर ली जब उसने एआई-चालित चैटबॉट्स का उपयोग करके यात्राओं के प्राथमिकता, रुचियों और बजट के आधार पर स맞ायोजित यात्रा कार्यक्रम बनाए।

वояह के सीईओ, जैन के अनुसार

"हमारी तकनीक एक फ़ेवर्स में से कर सकती है कि डेस्टिनेशन, एक्टिविटीज़ और आवासों का एक मिलियन संभव संयोजनों को बस कुछ 秒ों में एनालाइज़ कर ले, जिससे हर यात्रा के लिए एक अनभुलकारी व्यक्तिगत यात्रा का अनुभव हो।"

पिछले वर्ष की उपलब्धियां

वояह ने पिछले वर्ष में ही ३००% की वृद्धि देखी, और बुकिंग्स और आय में भी वृद्धि हुई है।

वॉययाह की नवीन दृष्टि ने उद्योग विशेषज्ञों को अपना ध्यान आकर्षित किया है। रोहन वर्मा, भारतीय पर्यटन और यात्रा प्रौद्योगिकी संस्थान के निदेशक, कहते हैं, "वॉययाह बस एक यात्रा प्लेटफॉर्म नहीं है – वह एक अनुभव डिज़ाइनर है। एआई और मशीन लर्निंग का उपयोग करเค, वे个त्वको निर्धारित अनुभवों को सृजित कर सकते हैं, जो व्यक्तिगत यात्रियों की आवश्यकताओं को पूरा करते हैं, और भारत में ऑनलाइन सटीक यात्रा अनुभव प्रदान करते हैं।"

क्रांतिकारी भारतीय सैर: ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स ने ट्रैवल इंडस्टリー को रिबूट कर दिया

वॉययाह और समान शुरुआती कंपनियों ने ट्रैवल इंडस्टリー में हड़ताल की, जिसके परिणाम Experts के बीच विभाजित हैं। एक ओर, दिल्ली विश्वविद्यालय के पर्यटन अर्थशास्त्र के प्रमुख डॉ. रोहिनी धार का मानना है कि हाइपर-पرسनलाइजेशन भारतीय यात्रियों के लिए एक गेम-चेंजर होगा। "वॉययाह की एआई-पावर्ड सिफारिशें और स्थानीय सम्मलेन अनुभव, हम नहीं बस टूरिस्ट की जरूरतें पूरी कर रहे – हम यात्रियों और मेज़बानों के बीच वास्तविक संपर्क स्थापित कर रहे हैं, भारत में ऑनलाइन यात्रा अनुभव प्रदान कर रहे हैं," वह कहती हैं।

अन्य ओर, संजय गुप्ता जो ट्रेवल इंडस्ट्री के वेटरन और इंडिया-आधारित टूर ऑपरेटर इन्स्पिकेबल जौर्नीज के सीईओ हैं, वह अधिक सावधान हैं। "जबकि मैं Voyaah की नवीन प्रवृत्ति का सम्मान करता हूँ, लेकिन मैं चिंतित हूँ कि यह हाइपर-पेर्सनैलाइजेशन का फोकस ने भारत की संस्कृतिक न्यूनतम को खो दिया, जो भारत को इतना एक्सीलेंट बनाता है," वह चेतावनी देता है।

क्या अगला है?

क्रांतिकारी भारतीय सैर: ऑनलाइन प्लेटफॉर्म रीबूट ट्रैवल

भारत में यात्रा के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉरमों के नवीनीकरण के साथ, आने वाले हफ्तों और महीनों में कई महत्वपूर्ण विकास उम्मीद किये जा रहे हैं। सबसे पहले, Voyaah ने अपने स्थानीय अवमिश्रण कार्यक्रम को भारत के अधिक स्थानों पर फैलाने की योजना बनाई है, जिसमें चेरपुन्जी और मेघालय जैसे अपेक्षाकृत स्थान शामिल हैं। अगले, उद्योग के प्रवक्ताओं ने यात्रा स्टार्टअप्स और伝統ीय टूर ऑपरेटर्स के बीच सहयोग की उम्मीद की है, जिसमें टेक्नोलॉजी-ड्राइवन सॉल्यूशंस को मानव विशेषज्ञता से मिलाया जाएगा।

क्रांतिकारी भारतीय सैर: ऑनलाइन प्लेटफॉर्म रिबूट ट्रैवल

क्वarters २ २०२३ के अंत तक, हम Voyaah की एआई-पावर्ड बुकिंग प्लेटफॉरम को लाइव देखेंगे, जिससे यूजर्स अपने स्वयं के कस्टमाइज्ड इटिनेररीज क्रिएट कर सकेंगे और भारत में ऑनलाइन पर्सनलाइज्ड ट्रैवल एक्सपीरियंस का आनंद ले सकेंगे। और २०२४ के मध्य तक, Expect हyper-पर्सनालाइज्ड ट्रैवल एक्सपीरियंस की नई लहर सामने आएगी, जिसका आधार डेटा एनालिटिक्स और मशीन लर्निंग पर होगा, जिससे बिल्कुल यूनीक गेटवेज़ पैदा होंगे।

वояह का सपना

२०२३ के अंत तक वояह अपने ऑफरिंग्स को व्यक्तिगत यात्रा अनुभवों में विस्तारित करने की योजना बना रहा है, जिससे यात्रियों को उनके प्राथमिकता, रूचि और बजट के आधार पर अपने इटिनेररी को संशोधित करने में सक्षम होगा।

इससे यात्रियों को एक अधिक सम्मलेन अनुभव का आनंद लेने में सक्षम होगा, वояह के AI पावर्ड चैटबॉट्स ने个व्यक्तिगत आवश्यकताओं के आधार पर संशोधित इटिनेररी तैयार करेंगे।

भारतीय यात्रा उद्योग की डिजिटल पुनर्स्थापना

भारतीय यात्रा उद्योग अपने डिजिटल परिवर्तन के साथ जारी रहता है, एक बात स्पष्ट है: भारत में ऑनलाइन व्यक्तिगत यात्रा अनुभव अब रहेंगे। Voyaah के नेतृत्व में हम एक नई अवधि के लिए तैयार हैं, जिसमें सामान्य, टेक-ड्रIVEN यात्रा है, जिसका अर्थ "मुक्ति" भारतीयों के लिए पुनर्परिभाषित होगा। जब हम आगे बढ़ते हैं, तो नवाचार और संस्कृति संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करना आवश्यक है – ऐसा कि हमारी टेक्नोलॉजी से प्यार नहीं ख़रीदता है, बल्कि भारत के समृद्ध इतिहास को नुकसान नहीं पहुंचाता।