भारतीय गहरे प्रौद्योगिकी स्टार्टअप्स को वृद्धि की चुनौतियाँ मिल रही हैं; रणनीतिक दृष्टिकोण की कमीrowth का हतोत्साहित कर रही हें
भारतीय गहरे प्रौद्योगिकी स्टार्टअप्स स्केलिंग के माध्यम से लड़ाई कर रहे हैं, और इसका कारण एक नवीन विचारों की कमी या प्रतिभाशाली उद्यमियों की नहीं है। अस्तु, भारत ने दुनिया भर में सबसे रोमांचक और अग्रसर गहरे प्रौद्योगिकी कंपनियों का उत्पादन कर रहा है। लेकिन, प्रारंभिक जीएमटी (गो-टू-मार्केट) चुनौतियाँ और मुक्त पायलोट्स स्टार्टअप्स के लिए महत्वपूर्ण वृद्धि प्राप्त करने से रोकते हैं।
क्या हुआ
भारतीय डीप-टेक स्टार्टअप्स के लिए प्रेमेचूर जीटीएम चॉइसें नुकसान का कारण बन गईं।
भारत के डीप-टेक स्टार्टअप्स की नाकामी: प्रेमेचुर गटीएम चॉइस
भारत के डीप-टेक स्टार्टअप्स ने अपने हस्त्य समीक्षण के लिए GTM रणनीतियों में झिझक दिखाई है। एक recent रिपोर्ट के अनुसार, CRN एशिया ने पाया कि लगभग 70% भारत के डीप-टेक स्टार्टअप्स अपने उत्पाद या सेवाओं को बिना किसी स्पष्ट GTM योजना के लॉन्च करते हैं, जिसके परिणामस्वरूप महत्वपूर्ण हानि और मिस्ड अवसर होते हैं। यह एक नया घटनाक्रम नहीं है; 2019 में नैसकॉम द्वारा किए गए शोध से पता चला कि भारत के स्टार्टअप्स प्रति महीने औसतन $150,000 की हानि कर रहे थे क्योंकि वे प्रेमेचुर गटीएम चॉइस करते थे।
मेरा मानना है कि ये स्टार्टअप इतने उत्साहित हैं कि अपने प्रोडक्ट को बाहर निकालने की जद्दोजहद में वे एक स्थिर GTM स्ट्रेटजी विकसित नहीं कर रहे हैं
रोहन वर्मा के अनुसार, i2i वेंचर्स के संस्थापक और सीईओ, "यहां परिणाम यह है कि वे पैसा टेबल पर छोड़ देते हैं क्योंकि अपने प्रोडक्ट को प्रभावी ढंग से बाजार में लाने और बेचने में असमर्थ होते हैं"
भारतीय डीप-टेक स्टार्टअप्स को उनके हस्तगत GTM स्ट्रेटजी के कारण स्केलिंग चुनौतियों का सामना करना पड़ता है
भारतीय गहरे प्रौद्योगिकी कंपनियों की समस्या और अधिक सम्मानित हो जाती है
पायलट नि:शुल्क में उनकी संख्या के कारण। ८५% इन कंपनियों ने अपने संभावी ग्राहकों के लिए नि:शुल्क परीक्षण या पायलट ऑफर किया, उम्मीद करते हैं कि शब्द-मुँह विज्ञापन से वृद्धि लाने में मदद करें। लेकिन, यह समाधान अक्सर महत्वपूर्ण लाभ नहीं देता, क्योंकि इसका कोई स्पष्ट रूपांतरण का मार्ग नहीं है।
विशेषज्ञ की दृष्टि
हम भारतीय डीप-टेक स्टार्टअप्स में कई से लड़ रहे हैं, जिनके लिए मुक्त पायलटों को भुगतान कर ने एक बड़ा मुद्दा है - ऐसा कहता है, चिराते वेंचर्स की पार्टनर अनंद देसाई। "इन स्टार्टअप्स के लिए मुक्त पायलटों को भुगतान कर ने नहीं करना उनके लिए समय और संसाधनों का महत्वपूर्ण नुकसान है"। भारतीय डीप-टेक स्टार्टअप्स में मुक्त पायलटों की प्रादा स्केलिंग की क्षमता को प्रभावित करती है।
भारतीय गहरे प्रौद्योगिकी कंपनियों के लिए Scaling चुनौतियां सामना करने के दौरान, विशेषज्ञ विभाजित हैं कि मूल कारण क्या है।
कुछ लोग मानते हैं कि प्रारंभिक GTM निर्णयों की वजह से मुख्य अपराधी है, जबकि अन्य तर्क देते हैं कि मुफ्त पायलट्स और संरचित गो-टू-मार्केट स्ट्रategीज़ की कमी समस्या को अधिक बिगाड़ती है।
प्रारंभिक जीटीएम चुनाव भारतीय सुदृढ़-तकनीकी कंपनियों को नुकसान पहुंचाते हैं; मुक्त पृष्ठ
मैंने कहा, "यह दोनों का मिश्रण है," बॉटलैब्स, एक एआई-पावर्ड चैटबोट स्टार्टअप के सीईओ रोहन वर्मा ने. "भारतीय सुदृढ़-तकनीकी कंपनियां अक्सर जीटीएम में प्रवेश करती हैं, लेकिन अपने लक्षित उद्योग या बाज़ार की आवश्यकताओं को पूरी तरह समझ नहीं लेतीं। इससे संसाधनों की बर्बादी और अवसरों की हानि होती है." वह जोर देता है कि एक अच्छा सोचा हुआ जीटीएम रणनीति सफल पैमाने के लिए आवश्यक है।
प्रेमात्र गटीएम निर्णय स्टार्टअप की समुद्र-गहरा समस्या हैं; मुक्त पायलट या पायलट परियोजनाएं स्टार्टअप के लिए अपने उत्पाद या सेवाओं को टेस्ट करने के लिए अनुमति देती हैं, इससे पहले कि वे पूर्ण-स्केल लॉन्च में निवेश करें
राकेश जैन, उद्योग वेटरन और वेंचर कैपिटलिस्ट, एक अधिक सूक्ष्म दृष्टिकोण रखते हैं। "जबकि प्रेमात्र गटीएम निर्णय निश्चित तौर पर समस्या हैं, मैं सोचता हूँ कि असली मुद्दा यह है कि स्टार्टअप के लिए मुक्त पायलट या पायलट परियोजनाएं नहीं मिल पातीं, जिससे वे अपने आईडिया को वैलिडेट कर पाने और ट्रैक्शन बनाने में समस्या आती है।"
क्या आगे होगा
भारतीय डीप-टेक स्टार्टअप्स को स्केलिंग चुनौतियों से निपटने की कोशिश में, विशेषज्ञ आने वाले हफ्तों और महीनों में कुछ महत्वपूर्ण घटनाक्रम पredict कर रहे हैं। पहले, निवेशक लोगों को जो स्पष्ट GTM रणनीति और प्रभावी स्केलिंग क्षमता दिखाते हैं, उनमें फंडिंग बढ़ाने की संभावना है। इससे प्रोडक्ट डेवलपमेंट में निवेश की ओर शिफ्ट हो सकती है और अधिक समग्र व्यावसायिक योजना की ओर।
अगले क्वार्टर में प्रतिभा की बढ़ती प्रतिस्पर्धा देखा जाने की उम्मीद है, क्योंकि भारत के शीर्ष-स्तरीय डीप-टेक स्टार्टअप सबसे अच्छे और brightest इंजीनियर्स और रीसर्चर्स को आकर्षित करेंगे।
इसका मतलब है कि इन स्टार्टअप्स के लिए अच्छी तरह सोचे-समझे GTM स्ट्रेटजीज़ की आवश्यकता है, जिससे वे एक पंक्तिबद्ध बाज़ार में अलग दिख सकें।
प्रमुख तिथियाँ देखने की आवश्यकता हैं
पहले सालाना भारत टेक सम्मेलन की आगामी संस्करण, जिसको उम्मीद है कि स्केलिंग चुनौतियों और नवीन गो-टू-मार्केट पद्धति पर पैनल होंगे। इसके अलावा, कई बड़े निवेशकों को भारतीय डीप टेक शुरुआतों के लिए नए फंडिंग योजनाएं घोषित करने की उम्मीद है, जिससे सफलतापूर्वक स्केलिंग के लिए उन्हें आवश्यक सहायता मिल सकती है।