क्या हुआ
भारत के स्पेस इंडस्ट्री का टैलेंट ड्रेन अभी और बुरा होने लगा है, जिसके परिणामस्वरूप भारत सरकार को अपने ambitious प्लान्स के लिए फिर से सोचना पड़ा है। इस टैलेंट ड्रेन ने हाल के वर्षों में ISRO में कई साइंटिस्ट्स और इंजीनियर्स की छोड़ दी, जिसके परिणामस्वरूप देश के स्पेस एक्सप्लोरेशन में बड़े प्लेयर बनने के सपने खतरे में पड़े हैं।
भारत के ambitious स्पेस प्रोजेक्ट को मिल रहा ब्रेन ड्रेन की चुनौती
कहते हैं कि २०१८ से संस्थान राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) से अधिक २०० वैज्ञानिक निकल गए हैं, जिनमें कई और आने वाले हैं। इस निकास को खराब कर्मचारी स्थितियों, लोगों की कमी और अपर्याप्त मुआवज़े पर दोषी ठहराया गया है। "भारत सरकार को इन टैलेंट के निकास के मूल कारणों को संबोधन करना चाहिए अगर वह अपने स्पेस एambitions प्राप्त करना चाहता है," कहा डॉ. एपी जे अब्दुल कलाम सेंटर के निदेशक, डॉ. अनुराग कुमार ने। सेंटर भारत में एक अग्रणी शोध संस्थान है।
क्या मायने रखता है
ISRO की सबसे हालिया असफलता पीएसएलव-सी४९ मिशन के नुकसान से शुरू हुई, जो इस महीने के शुरुआत में हुआ था. यह मिशन ISRO के लिए एक बड़ा मीलपॉइंट होने वाला था, लेकिन लॉन्च के बाद सिर्फ १५ मिनट में सैटेलाइट से संपर्क खो जाने से इसका नुकसान हुआ. यह घटना ISRO की長 期 स्थायित्व की क्षमता पर गंभीर सवाल उठाती है.
भारत की अंतरिक्ष कार्यक्रम और अर्थव्यवस्था में ब्रेन ड्रेन के महत्वपूर्ण परिणाम हैं।
भारत के शीर्ष प्रतिभाशाली कई संख्या में ISRO से निकल जाते हैं, जिसके परिणामस्वरूप देश को विश्व की अंतरिक्ष उद्योग में अपना प्रतियोगी एज़ लुप्त होने का खतरा है। "यह नहीं只是 एक ISRO का मुद्दा, यह राष्ट्रीय समस्या है," डॉ. सुगंधा पुडूपक्कम, एक प्रमुख अंतरिक्ष नीति विशेषज्ञ ने कहा। " अगर हम अपने सबसे अच्छे वैज्ञानिकों को रिटेन नहीं कर सकते, तो हमเทคโนโลยी का विकास नहीं कर पाएंगे जिसके परिणामस्वरूप अर्थव्यवस्था में आर्थिक वृद्धि होगी और नौकरियां बनेंगी." भारत सरकार को तत्काल कदम उठाना चाहिए, अन्यथा यह अंतरिक्ष उद्योग में भारत के स्थान को खतरे में डाल देगा।
विशेषज्ञ की दृष्टि
भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी (ISRO) के ब्रेन ड्रेन ने भारत को अपनेambitious स्पेस प्रोग्राम का पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है।
भारतीय अंतरिक्ष उद्योग का प्रतिभा संक्रमण ISRO के लिए चिंताजनक है
अंतरिक्ष विशेषज्ञों को इस मुद्दे पर एक साझा समाधान निकालने में विभाजित कर दिया गया है। डॉ. राकेश मिश्रा, आईआईटी दिल्ली के aerospace इंजीनियर और केन्द्र के निदेशक, सरकार को तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर देते हैं। "हमें एक आकर्षक कार्य वातावरण बनाने की आवश्यकता है, प्रतिस्पर्धी वेतन, बेहतर कार्य स्थिति और वृद्धि के अवसर," वह निष्कर्ष निकालते हैं। "ISRO का प्रतिष्ठा एक प्रीमियर अंतरिक्ष एजेंसी के रूप में खतरे में पड़ा है। यदि हम इस प्रतिभा संक्रमण को नहीं समायोजित करते, तो भारत ग्लोबल अंतरिक्ष उद्योग में एक प्रमुख खिलाड़ी बनने का मौका हाथ से निकल जाएगा।"
दूसरी ओर, डॉ. नलिनी चंद्रा, एक अंतरिक्ष नीति विशेषज्ञ और पूर्व ISRO वैज्ञानिक, एक आगाही नोट देते हैं। "इस प्रतिभा संक्रमण की मूल वजह नहीं बस पैसे या कार्य स्थिति है, बल्कि ISRO के अंदर स्पष्ट दृष्टि और दिशा की कमी भी है," वह तर्क करते हैं। "जब तक हम एक सुस्त्र स्पेस प्रोग्राम नहीं बनाते, जिसमें सभी संभंधों को लाभ हो, वैज्ञानिक लगातार बेहतर अवसरों के लिए विदेश में जाएंगे।"
क्या आगे होगा
भारत सरकार अपनेambitious स्पेस प्लान्स को दोबारा सोच रही है, आने वाले हफ्तों और महीनों में कई महत्वपूर्ण विकास उम्मीद हैं. ISRO एक नया पांच-वर्षीय योजना जारी करेगा, जिसके लिए टैलंट रिटेन करना और साइंटिस्ट्स और इंजीनियर्स के लिए काम करने की स्थिति में सुधार करना शायद प्राथमिकता होगी. सरकार ने भी एक स्पेस टेक्नोलॉजी इन्क्यूबेटर स्थापित करने का फैसला किया है, जिसका उद्देश्य सेक्टर में नवीनीकरण और उद्यमशीलता प्रोत्साहन करना है.
इसरो की ब्रेन ड्रेन भारत को अपनेambitious स्पेस प्लान पर फिर से सोचने के लिए मजबूर कर रही है
इसरो और निजी स्पेस कंपनियों के बीच अधिक सहयोग और उपग्रह प्रौद्योगिकी में निवेश की उम्मीद है। महत्वपूर्ण मीलपॉइन्ट्स जिसका अनुसरण करना चाहिए, उनमें इस साल के अंत तक भारत के पहले निजी फंडेड उपग्रह विक्रम के लॉन्च की शेड्यूल्ड तारीख और अगले क्वार्टर में नई भारतीय स्पेस पॉलिसी की घोषणा शामिल है।
भारत की अंतरिक्ष उद्योग प्रतिभा संकट जारी है
भारत के लिए स्पष्ट है कि देश को अपने अंतरिक्ष परीक्षण के तरीके को फिर से सोच ना होगा
भारत सरकार के पास एक अनूठा मौका है कि वह ISRO को जीवित करे और सभी हितधारकों के लिए एक स्थायी अंतरिक्ष कार्यक्रम बनाए
इस तरह भारत अपने स्थान को फिर से प्राप्त कर सकता है - एक महत्वपूर्ण कदम जिसके माध्यम से वह अपने लिए एक अंतरिक्ष उद्योग प्रतिभा संकट-मुक्त भविष्य की कल्पना को साकार कर सके