भारतीय अंतरिक्ष उद्योग की मानसिक पलायन संकट का स्तर危機 के स्तर तक पहुँच गया है, जिससेambitious proyectos और programmes को खतरा है।
क्या हुआ
भारत के अंतरिक्ष उद्योग में ब्रेन ड्रेन संकट की स्थिति है
भारतीय अंतरिक्ष उद्योग में करीब २०० वैज्ञानिक और इंजीनियर नौकरी छोड़ लिए या असीमित अवकाश ले लिए हैं, इस वर्ष की शुरुआत से लेकर अब तक
यह ब्रेन ड्रेन एक संयोजन कारकों के कारण है, जिसमें खराब कार्य स्थिति, अपर्याप्त वेतन और विकास के अवसर नहीं मिलने का संकट है
最新 की सबसे बड़ी चोट ने आईएसआरओ के सबसे अनुभवी और सम्मानित वैज्ञानिक, डॉ. राकेश मिश्रा के इस्तीफे से आया, जिन्होंने "सृजनात्मक अंतर" के साथ संगठन के नेतृत्व का उल्लेख किया
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मैं निराश नहीं हूँ इस मास एक्सोडस से - डॉ. ए. एस. कीरण कुमार, आईएसआरओ के पूर्व अध्यक्ष कहते हैं। "संगठन पिछले वर्षों से प्रबंधन की कमजोरी और विजन की कमी से पीड़ित रहा है। इससे नेचुरल है कि प्रतिभाशाली प्रोफेशनल्स बेहतर अवसरों की तलाश में हैं।"
भारतीय अंतरिक्ष उद्योग का ब्रेन ड्रेन
क्यों यह महत्वपूर्ण है
भारत की अंतरिक्ष उद्योग के लिए ब्रेन ड्रेन के परिणाम दूरगामी हैं और इसके महत्वपूर्ण परिणाम हैं।
अनुकूल संस्थापकों का निकल जाना, जैसे गगनयान मानव अंतरिक्ष यात्रा और चंद्रयaan-३ चंद्रमा यात्रा अब विलंबित होने या पूरी तरह स्क्रैप होने का खतरा में हैं। देश की नई उपग्रह लॉन्च करने और अपने मौजूदा फ्लीट का संचालन करने की क्षमता भी खतरे में है।
विशेषज्ञ की दृष्टि
इस ब्रेन ड्रेन का सीधा प्रभाव होगा भारत के ग्लोबल स्पेस मार्केट में प्रतिस्पर्धा करने की उसकी क्षमता पर, चेतावनी देते हुए डॉ. अनिल भارد्वज, उद्योग अधिवक्ता समिति के निदेशक, भारतीय स्पेस कंपनियों के संघ के। "हम Already देरी हो रही है प्रोजेक्ट टाइमलाइन और बढ़ते लागत के कारण स्किल्ड सtaff की कमी के परिणाम से। यदि यह रुझान जारी रहता है, तो भारत स्पेस रेस में पीछे छूट जाएगा।"
भारत के अंतरिक्ष उद्योग की मानसिक प्रवासन संकट ने ISRO के कार्यबल पर आघात डाला है
भारतीय अंतरिक्ष उद्योग के विशेषज्ञों को इस संकट की गंभीरता और समाधान के बारे में मतिभेद है। डॉ. रोहिनी मिश्रा, ताता संस्थान के fundamental research में अग्रणी Astrophysicist, लंबे समय के परिणामों पर जोर देते हैं: "पेशेवर प्रवास की हानि भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण नुकसान है। इंजीनियर और वैज्ञानिक को सालों में ट्रेन किया जाता है; यदि इस संकट को जल्द नहीं समाधान किया जाता, तो इसके दूरगामी परिणाम होंगे।"
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क्या आगे होगा
कभी दो दशक से अधिक अनुभवी डॉ. विक्रम कुमार ने संयम से आशावादी रहे: "यह सच है कि ISRO एक प्रतिभा निकलने से निबाहला है, लेकिन मैं समझता हूँ कि संगठन इन परिवर्तनों को समायोजित कर सकता है. उचित योजना और रणनीतिक साझेदारियों से भारत अपने अंतरिक्ष लक्ष्यों को प्राप्त कर सकता है."
भारत के अंतरिक्ष उद्योग में संकट
क्राइसिस unfold होने पर कई महत्वपूर्ण तिथियां भविष्य की तस्वीर बना देंगी। अगले कुछ सप्ताहों में ISRO ने内部 पहल करके संकट को रोकने का प्रयास करेगा, जिसमें शेष स्टाफ के लिए कैरियर काउंसलिंग और ट्रेनिंग प्रोग्राम शामिल हैं। मध्य गर्मी तक हम अंतरराष्ट्रीय प्रतिभा आकर्षित करने और देश के अंतरिक्ष शिक्षा सистемा को फिर से लाने की उम्मीद करेंगे।
भारत की अंतरिक्ष उद्योग का मानसिक संकट
ISRO केAmbitious Gaganyaan ह्यूमन स्पेसफ्लाइट प्रोग्राम के लॉन्च के आने वाले महीनों में महत्वपूर्ण मीलपॉइंट शामिल हैं, जिसकी शेड्यूल्ड डेट 2023 के आखिरी महीनों में है। इस उच्च प्रोफाइल प्रोजेक्ट को ISRO की क्षमता पर निर्भर करेगा कि वह टॉप टैलेंट को रिटेन और रिक्रूट कर सके। इसके अलावा, भारत सरकार ने अंतरिक्ष अनुसंधान और विकास में फंडिंग बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई है, जिसका焦स् स्पेस टेक्नोलॉजी के व्यावसायीकरण पर है।