भारत की स्वास्थ्य संकट गहराता है क्योंकि अनुसंधान धन मात्र 0.02% GDP में शामिल है
भारत के स्वास्थ्य संकट ने जारी रहता है, एक नई रिपोर्ट ने देश के स्वास्थ्य अनुसंधान धन के लिए अल्प आवंटन प्रकाशित किया, जिसमें भारत के GDP का मात्र 0.02% खर्च होता है। इस अल्प निवेश के परिणाम बहुत बड़े हैं, जो करोड़ों भारतीयों के लिए स्वास्थ्य प्रणाली पर निर्भर करते हैं।
क्या हुआ
भारत के स्वास्थ्य संकट में गहरा हुआ
किसीRecent पैनल रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने 2022-23 में ₹1,500 करोड़ (लगभग $200 मिलियन USD) स्वास्थ्य शोध व्यय में रखा. यह अल्प सума आवश्यक ₹50,000 करोड़ (लगभग $6.7 बिलियन USD) से काफी दूर है, जिसकी आवश्यकता है भारत के आजकल की प्रेसिंग स्वास्थ्य चुनौतियों को संबोधन के लिए. डॉ. राकेश मिश्रा, भारतीय ट्रोपिकल चिकित्सा और सार्वजनिक स्वास्थ्य के निदेशक, स्वास्थ्य शोध में निवेश की कमी पर अफसोस जताया, "हम अपने सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्याओं के根本 कारणों को समझने में पर्याप्त नहीं Invest है. यह एक आपदा का नुस्खा है." भारत के स्वास्थ्य शोध व्यय नियोजन, जो उसके GDP का मात्र 0.02% है, देश के स्वास्थ्य संकट की अपूर्ण प्रतिक्रिया का एक कड़ा चिन्ह है.
पैनल रिपोर्ट के अनुसार
भारत की स्वास्थ्य संकट का समाधान Innovative solutions के लिए आवश्यक है, जो नॉन-कम्युनिकेबल बीमारियों (एनसीडी) के मुकाबले में मदद करें। एनसीडी के कारण 2030 तक भारत में सभी मौतों का 70% होने की भविष्यवाणी है, इसलिए देश इस महत्वपूर्ण क्षेत्र को Ignore नहीं सकता।
विशेषज्ञ का प्रस्ताव
भारत के स्वास्थ्य संकट का गहराया
डॉ॰ रुक्मिनी नAIR, इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के एपिडेमियोलॉजी और पब्लिक हेल्थ के केंद्र के निदेशक, भारत के स्वास्थ्य शोध फंडिंग की अलोकना को सरकार के लिए एक जागरण कॉल मानते हैं। "हम सufficient निवेश नहीं देख रहे हैं जिसके साथ इनोवेशन और स्वास्थ्य परिणामों को बेहतर बनाना हो सकता है," वह एक इंटरव्यू में कहीं। " अगर हम शोध की प्राथमिकता नहीं देते, तो हम imported समाधान पर निर्भर रहेंगे और अपने स्वास्थ्य चुनौतियों को उपेक्षा करेंगे।" भारत के स्वास्थ्य शोध फंडिंग अलोकना, जिसमें 0.02% GDP है, एक तत्काल ध्यान की आवश्यकता है।
भारत की स्वास्थ्य संकट गहराता है जबकि अनुसंधान निधि बनी रहती है
अन्य ओर, डॉ. आनंद सिबाल, एक प्रमुख जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ और भारतीय जन स्वास्थ्य संघ के पूर्व अध्यक्ष, अपने आकलन में अधिक सावधान हैं। उन्होंने निधि की बढ़ती आवश्यकता को मान्यता दी, लेकिन वे चेतावनी देते हैं कि भारत का अनुसंधान प्रणाली अभी ακόं विकसित है और ऐसे महत्वपूर्ण संसाधनों को अवश्य नहीं ले सकता। "हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हमारे अनुसंधान संस्थान इन प्रकार के निवेश को सम्भालने के लिए तैयार हैं, अन्यथा हम व्यर्थ संसाधनों को अप्रमाणिक या असरदार समाधान पर खर्च करते हैं।"
क्या आगे होगा
सरकार ने आने वाले बजट में स्वास्थ्य अनुसंधान के लिए फंडिंग बढ़ाने की घोषणा की, लेकिन जानकारियां अभी तक स्पष्ट नहीं हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि एक ठोस योजना अगले तिमाही में प्रस्तुत की जाएगी, जिसमें मुख्य मीलपॉइंट्स शामिल हैं:
मार्च २०२३: स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय को अपने संपूर्ण योजना लाने की उम्मीद है जिसके तहत स्वास्थ्य अनुसंधान फंडिंग बढ़ाने का प्रस्ताव है।
जून २०२३: भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) नई अनुसंधान अनुदान प्रस्तावों की समीक्षा शुरू करेगी, जिसके साथ देश की स्वास्थ्य नवाचार की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव आएगा।
भारत की स्वास्थ्य संकट गहराता है - शोध निवेश के बावजूद
भारत के स्वास्थ्य संकट पर बहस जारी है, लेकिन एक चीज Certain है - भारत के स्वास्थ्य संकट में तत्काल ध्यान देना आवश्यक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की चेतावनी के अनुसार, शोध और विकास में कम निवेश के कारण एक पγκόल global स्वास्थ्य संकट की भविष्यवाणी है, इसलिए भारत को अपने स्वास्थ्य शोध निवेश का प्राथमिकता देनी चाहिए ताकि वह बिना अलर्ट के नहीं रहे। भारत के स्वास्थ्य शोध निवेश की वृद्धि करके, भारत innovation को 推進 कर सकता है और अपने नागरिकों के लिए स्वास्थ्य परिणामों में सुधार कर सकता है।
भारत की स्वास्थ्य समस्या गहराते हुए अनुसंधान फंडिंग की निराशाजनक आवंटन
भारत की स्वास्थ्य अनुसंधान फंडिंग की अल्प आवंटन एक स्पष्ट चिन्ह है कि देश का स्वास्थ्य समस्या के प्रति अपर्याप्त जवाब है। हम आगे बढ़ने के लिए, नीतिमामों को अनुसंधान और विकास में निवेश करना चाहिए ताकि नवाचार को प्रेरित करें और स्वास्थ्य परिणामों को सुधारना। भारत की जीडीपी लगातार बढ़ रही है, इसलिए 0.02% के अलावा निवेश नहीं करना चाहिए, जिससे देश के स्वास्थ्य अनुसंधान की आवश्यकताओं को पूरा कर सके। अब समय है – भारत को इस अवसर का लाभ उठाना चाहिए और अपने स्वास्थ्य सम्बन्ध में एक नई शुरुआत करना चाहिए, ताकि उसके नागरिकों को वे गुणवत्ता सेवाएं प्राप्त हों, जिनकी उन्हेंNeeded.