क्या हुआ
भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम ने जारी रखा है, उद्यमियों ने आर्थिक सुधारों के बीच रिकॉर्ड फंडिंग अवसरों की ओर देखा है। देश ने वेंचर कैपिटल निवेश में उछाल देखा, कई स्टार्टअप हाल के महीनों में महत्वपूर्ण फंडिंग राउंड प्राप्त कर चुके हैं। तथा भारत स्टार्टअप फंडिंग अवसरों ने कभी नहीं दिखाए थे।
भारतीय स्टार्टअप्स की ओर रिकॉर्ड फंडिंग का लक्ष्य
प्रैसिस नामक शोध फर्म के अनुसार, जनवरी और अप्रैल के बीच इस साल भारतीय स्टार्टअप्स ने १३.८ अरब डॉलर का फंडिंग प्राप्त किया, जो पिछले साल के समान अवधि की तुलना में २२% की वृद्धि थी. रिपोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि इन निवेशों का अधिकांश हिस्सा फिनटेक, हेल्थटेक और एडीटेक कंपनियों के लिए गया. उदाहरण के तौर पर, बेंगलुरु-आधारित फिनटेक स्टार्टअप पेटीएम पेमेंट्स बैंक ने एंत फाइनेंशियल और सॉफ्टबैंक जैसे निवेशकों से ३०० मिलियन डॉलर का फंडिंग प्राप्त किया.
भारतीय स्टार्टअप फंडिंग के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव देखा जा रहा है
अनिल शाह, एक्सेल इंडिया की एक पार्टनर ने कहा, "सरकार के डिजिटल भुगतान और वित्तीय समावेशन के लिए प्रोत्साहन के साथ, फिनटेक सॉल्यूशंस की बढ़ती मांग है, जिसका परिणाम यह फंडिंग का इजाफ है"
इस फंडिंग का आना एक उद्यमियों के लिए भारतीय स्टार्टअप फंडिंग अवसरों का एक आदर्श तूफान बन गया है
क्या मायने रखता है
प्रैक्टो नामक मुंबई स्थित हेल्थटेक स्टार्टअप को १५० करोड़ डॉलर की निवेश प्राप्त हुई, जिसका उपयोग अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में अपने स présence को बढ़ाने के लिए किया जाएगा. इस निवेश की वृद्धि के परिणामस्वरूप भारत की अर्थव्यवस्था पर बहुत बड़े प्रभाव पड़ने की उम्मीद है.
भारत के स्टार्टअप्स की ओर से रिकॉर्ड फंडिंग का सपना
भारत की अर्थव्यवस्था पर फंडिंग की सर्गना के नतीजे बहुत ही महत्वपूर्ण होंगे। अधिक स्टार्टअप्स में महत्वपूर्ण निवेश प्राप्त होने से नवीनीकरण और रोजगार सृजन पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा। मैक्किन्जी & कंपनी के एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम 2025 तक एक करोड़ से अधिक रोजगार सृजन करने का सम्भावान है। इसके अलावा, इस बढ़ती फंडिंग से न केवल उद्यमियों को लाभ होगा बल्कि broader अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव भी होगा।
विशेषज्ञ का दृष्टिकोण
यह बढ़ा फंडिंग उद्यमियों के लिए ही नहीं बल्कि broader economy पर सकारात्मक प्रभाव डालेगी, नसकॉम के सीईओ रमेश अभिषेक ने कहा। "हम एक वир्तुएल साइकिल देख रहे हैं जहां स्टार्टअप में निवेश नौकरी सृजन और आर्थिक वृद्धि का नेतृत्व करते हैं।"
संपर्क
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भारतीय स्टार्टअप्स ने रिकॉर्ड फंडिंग प्राप्त की है, विशेषज्ञ इस दृश्य के असर पर विभाजित हैं।
भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम के संस्थापक और सीईओ, फिनटेक स्टार्टअप PaySense के रोहन वर्मा ने, इसके प्रभाव के बारे में.optimistic हैं। "भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम ने हमेशा नवीनता से चला, और ज्यादा फंडिंग आ रही है, तो हम और अधिक रोमांचक समाधानों की उम्मीद कर सकते हैं," वह कहा।
अन्य ओर
डॉ. प्रीति राधाकृष्णन, केंद्रीय नीति अनुसंधान संस्था की निदेशक और एक प्रमुख अर्थशास्त्री, सावधानी जताई। "फंडिंग में वृद्धि तो स्वागत है, लेकिन हमें बड़े चित्र के बारे में नहीं भूलना चाहिए – भारत की आर्थिक सुधारों के साथ सटीक उपायों से समानता और रोजगार सृजन को सम्बोधित करना होगा," वह आगाह की।
इन विपरीत दृष्टिकोणों ने मुद्दे की जटिलता को उजागर किया, भारत के स्टार्टअप बूम के लाभ और चिंताओं को उजागर करते हुए। उद्यमी भारत स्टार्टअप फंडिंग अवसरों की तलाश में हैं, इससे इन दृष्टिकोणों को ध्यान में रखना आवश्यक है।
क्या आगे आता है
भारतीय स्टार्टअप्स ने रिकॉर्ड फंडिंग प्राप्त की, अब आगे क्या पढ़ना चाहिए?
भारतीय स्टार्टअप्स को आने वाले हफ्तों और महीनों में क्या उम्मीद की जा सकती है? एक बात, PaySense कंपनी के सह-संस्थापक रोहन वर्मा का कहना है कि फिनटेक इस क्षेत्र में निवेशकों का ध्यान बना रहेगा। "हम भारत में डिजिटल पेमेंट्स के उपयोग में वृद्धि देख रहे हैं, और मैं सोचता हूँ कि हमें इस स्पेस में अधिक स्टार्टअप्स निकलने की उम्मीद है," उन्होंने कहा।
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डॉ॰ प्रीति राधाकृष्णन के अनुसार नीतिनामी लोगों को आर्थिक विभाजन का समाधान करना चाहिए। "सरकार को ये सुधार सभी भारतीयों के लिए लाभदायक होना चाहिए, नहीं जिनके पास पहले से ही अच्छा है," वह निर्देशित किया।
कुंजी तिथियां देखें
सितंबर में बजट सत्र होने वाला है, जहाँ नीति निर्माता भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम को समर्थन देने के लिए नई पहलें घोषित करेंगे। इसके अलावा, निवेशक और उद्यमी दोनों ही हाल के आईपीओ (इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग) के प्रदर्शन पर नज़र रखेंगे, जो भारत के स्टार्टअप के लिए मोड़ का संकेत होगा।