भारतीय-अमेरिकी सीईओ के नागरिकता चिंताएं: मैं अब नहीं आया होगा

भारतीय-अमेरिकी सीईओ, राहुल पटेल (Rahul Patel) ने कहा, "मैं अमेरिका में कारोबार करने के लिए वीज़ा की समस्याओं से डरा हुआ हूँ।"

भारतीय-अमेरिकी सीईओ की चिंताएं

भारतीय-अमेरिकी सीईओ, नीति मेहता (Niti Mehta) ने कहा, "अब मैं अमेरिका नहीं जाऊँगा।"

वीज़ा की समस्याएं

अमेरिका में भारतीय-अमेरिकी लोगों को वीज़ा प्राप्त करने में कठिनाई है। सीईओ, राहुल पटेल ने कहा, "वीज़ा प्रक्रिया में लंबित समय और अपेक्षाकृत उच्च शुल्क ने मेरे लिए अमेरिका में कारोबार करने के लिए प्रोत्साहन दिया।"

संकल्प

भारतीय-अमेरिकी सीईओ, नीति मेहता ने कहा, "अब मैं भारत में हूँ और मैं यहीं रहूँगा।"

क्या हुआ

अमेरिकन-भारतीय समुदाय को प्रवास संकट का सामना करना पड़ रहा है, कई पेशवरों ने संयुक्त राज्य अमेरिका से दूरी रखना शुरू कर दिया है क्योंकि लंबे और अनुमानित वीज़ा प्रोसेसिंग समय के कारण। भारतीय-अमेरिकन सीईओ रोहन देसाई के लिए अनुभव एक महत्वपूर्ण deterrent था जिसने उसे अपने परिवार को संयुक्त राज्य अमेरिका में फिर से नहीं ले जाने का संकल्प किया। "मैं अब नहीं चलता," वह कहता है, अनुमानित प्रक्रिया के बारे में सोचकर अपनी पत्नी और छोटे बच्चों के लिए एच-1बी वीज़ा प्राप्त करने के बारे में।

की समस्या ने २०२० में ध्यान आकर लिया जब ट्रंप प्रशासन ने नई नियमों को पेश किए जिनका उद्देश्य आप्रवास सीमाओं को कड़ा करना था। परिवर्तनों ने आवेदन प्रसंस्करण समय में एक महत्वपूर्ण वृद्धि की, जिसमें कई भारतीय-अमेरिकन लोग दो वर्ष या अधिक समय तक अपने वीज़ा की स्वीकृति का इंतजार कर रहे थे। देसाई का अपना अनुभव अस्पष्टता और निराशा से चिह्नित था। "हमने जनवरी २०२० में हमारे एच-१बी वीज़ा के लिए आवेदन किया, लेकिन सितंबर २०२२ तक हमें अंतिम स्वीकृति मिली, जब तक," वह याद करता है। दीर्घ प्रक्रिया ने उसे अपने योजनाओं पर रोकने को मजबूर कर दिया, जिसमें एक потен्शियल नौकरी ऑफर अमेरिका में थी। "यह एक बड़ा सेटबैक था, और मैंने अपने परिवार के भविष्य के लिए अल्टरनेटिव आरेंजमेंट्स बनाने पड़े."

हाल के आंकड़ों के मुताबिक

जनवरी २०२० से सितंबर २०२२ के बीच, अमेरिकन-भारतीयों से ह-१ब वीज़ा आवेदनों की संख्या १५०,००० से अधिक थी, जिनमें से कई प्रोफेशनल इंडिया में रहकर या कैनडा या ऑस्ट्रेलिया जैसे दूसरे देशों में रहने का चुनाव करते हैं।

Indian-アメリカ सीईओ के प्रवासी चिंताएं एक बड़ा मुद्दा हैं, क्योंकि अमेरिकी अर्थव्यवस्था immigrant विशेषज्ञता पर अधिक निर्भर करती है। "यह नहीं बस एक निजी मुद्दा है, यह एक आर्थिक मुद्दा है," कहते हैं प्रवासी विशेषज्ञ, डॉ. मीनाक्षी चौधरी। "हम देख रहे हैं कि शीर्ष-स्तर का टैलेंट अन्य जगह पर काम करना चुनता है, जिसके लंबे समय के परिणाम हो सकते हैं नवाचार और वृद्धि के लिए।"

क्यों यह importantes है

हिंदी-अमेरिकन प्रोफेशनल्स के लिए ये संकट के परिणाम बहुत दूरगामी हैं। न केवल वे अस्पष्टता और निराशा से जूझ रहे हैं, बल्कि पूरा टेक इंडस्त्री भी मूल्यवान प्रतिभा को हाथ से निकलने से खतरे में पड़ा है।

विशेषज्ञ की दृष्टि

भारतीय-अमेरिकन समुदाय की आवासीय चिंताएं विशेषज्ञों में चर्चा का कारण बन गई हैं।

Indian-American community's immigration concerns have sparked debate among experts.

डॉ. राकेश पटेल, एक आवासीय वकील और यू.C.L.A. (यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, लॉस एंजेलस) में प्रोफेसर हैं, जो स्थिति के सुधार की उम्मीद करता है।

Dr. Rakesh Patel, an immigration lawyer and professor at the University of California, Los Angeles (UCLA), is optimistic that the situation will improve.

"लम्बी समय में वीज़ा प्रोसेसिंग टाइम्स हैं, लेकिन मैं मानता हूँ कि संयुक्त राज्य सरकार इन मुद्दों को हल करने के लिए प्रतिबद्ध है।"

"While it's true that visa processing times are lengthy, I believe the US government is committed to addressing these issues," he said.

"हमने हाल के सालों में進歩 देखा है और मैं निश्चित हूँ कि advocacy ग्रुप्स और सांसदों की लगातार दबाव से, हमें और सुधार दिखाई देगा।"

"We've seen progress in recent years, and I'm confident that with continued pressure from advocacy groups and lawmakers, we'll see further reforms."

अन्य ओर

अजय जैन, पूर्व मиг्रेशन अधिकारी जो अब इंडियन-अमेरिकन कम्युनिटी फेडरेशन के सिर हैं, अधिक सतर्क हैं. "वर्तमान सिस्टम टूटा है और इससे बदतर होता जा रहा है. हमें無सीम केस देखे हैं कि प्रतिभाशाली पेशेवर अपने करियर और परिवार के बीच चुनने को मजबूर हैं, वीज़ा के सन्दर्भ में अस्पष्टता के कारण. जब तक हम संभाव्य परिवर्तन नहीं देखते, मैं किसी को अमेरिका में शिफ्ट करने के लिए सलाह नहीं देता."

क्या अगला है

भारतीय-अमेरिकन समुदाय इन चुनौतियों से निपटने जारी रहता है, कई महत्वपूर्ण तिथियाँ देखने लायक हैं. यूएस सिटीजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (यूसीसीआई) गर्मी के अंत तक 2023 में एच-1बी वीजा प्रसंस्करण के लिए नई दिशा-निर्देश जारी करने की उम्मीद है, जो भारतीय प्रोफेशनल्स के अमेरिका में प्रवेश पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है.

हिंदी:

आगामी हफ्तों में, पाठकों को उम्मीद है कि समूह जैसे इंडियन-एメリカन कम्युनिटी फेडरेशन और नेशनल असोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर और सर्विस कंपनीज (एनएसएसकॉम) से अधिक लobbies का प्रयास होगा। ये संगठन विधायकों से आग्रह करेंगे कि अमेरिका में भारतीय पेशवरों को जाने के लिए वीज़ा प्रोसेसिंग बैकलॉग को समायोजित करें और इससे अधिक स्पष्टता प्रदान करें।

भारतीय-अमेरिकन लोगों का अमेरिका से प्रवास: नीतिनामी चेतावनी है

भारतीय-अमेरिकन लोगों के अमेरिका से प्रस्थान की समस्या नीतिनामी लोगों के लिए एक जागृति का संदेश है. हमारे देश की अर्थव्यवस्था टैलेंटेड मigrants पर依赖 करती रहती है, इसलिए हमें अपने पुराने प्रवास नियमों को सुधारना चाहिए. जब तक ऐसा नहीं होगा, भारतीय-अमेरिकन सीईओ जैसे रोहन जैन अपने परिवारों को अमेरिका में ले जाने के बारे में सोचते रहेंगे. अब नीतिनामी लोगों को कदम उठाने और इन उच्च-कुशल पेशवरों के लिए एक अधिक स्वागत योग्य वातावरण बनाना चाहिए. जब भारतीय-अमेरिकन लोगों के सामने इन चुनौतियां आती हैं, तो यह स्पष्ट है कि प्रवास संबंधी समस्याएं राष्ट्रीय महत्व की नहीं, बल्कि मानवता की गरिमा का मामला भी है.