क्या हुआ
भारत ने विश्व सामान्य चिकित्सा दवाओं के बाजार में एक उल्लेखनीय 30% हिस्सेदारी से ग्राहकी की, जिसके परिणामस्वरूप देश की फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्री ने लाभ उठाया है। भारत से विश्व की एक बड़ी राशि सामान्य चिकित्सा दवाएं आपूर्ति होती हैं, इसलिए यह आश्चर्य नहीं है कि इस क्षेत्र ने देश के विकास इंजनों में से एक बन गया है।
भारत ने वैश्विक जनरल मेडिसिन बाजार में 30% की शेयर हासिल किया
भारत के स्वास्थ्य राज्य मंत्रालय के अनुसार, अनुप्रिया पटेल ने, हाल के वर्षों में भारत के जनरल मेडिसिन निर्यात बाजार शेयर में एक उल्लेखनीय उछाल देखा है. "भारत अब वैश्विक जनरल इंडस्ट्री का बड़ा खिलाड़ी बन गया है, हमारे निर्यात कीमत 10 अरब डॉलर से अधिक हैं," पटेल ने हाल के इंटरैक्शन में कहा. देश का फार्मास्यूटिकल सेक्टर 12% की संयुक्त वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़ा है, जिसका मुख्य कारण ग्लोबली अफोर्डेबल जनरल मेडिसिन की मांग थी.
क्यों यह मायने रखता है
भारत की जनरल्स इंडस्ट्री ने देश के एक साथ प्रोड्यूसर और उपभोक्ता के रूप में उसकी अनुकूल स्थिति के कारण बढ़ाई गई है। कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियां भारत में अपना कारखाना स्थापित कर रहीं हैं ताकि उसके लागत प्रभावी निर्माण क्षमताओं का लाभ उठाया जाए, इस क्षेत्र को तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। वास्तव में, भारत के जनरल मेडिसिन एक्सपोर्ट मार्केट शेयर ने महत्वपूर्ण वृद्धि देखी है, जिससे देश अब toànव्यापी बाज़ार में 30% का हिस्सा बन गया है।
भारत की जनरल मेडिसिन का विश्व स्तर पर प्रभुत्व
भारत की जनरल मेडिसिन का विश्व स्तर पर प्रभुत्व ने दोनों रोगियों और फार्मास्यूटिकल कम्पनीज के लिए दूरगामी असर डाला. रोगियों के लिए इसका अर्थ है सस्ती जीवन-रक्षक दवाओं काクセ्स कि अन्यथा उपलब्ध नहीं थी. डॉ. विनोद पॉल, स्वास्थ्य मंत्रालय के पूर्व सचिव ने, कहा, "भारत की जनरल इंडस्ट्री लाखों लोगों के लिए एक जीवन-रेखा है जिनके लिए महंगे ब्रांडेड दवाओं का सस्ता विकल्प नहीं था." इसके अलावा, भारत की जनरल मेडिसिन निर्यात बाजार शेयर ने देश को विश्व स्वास्थ्य पृष्ठभूमि में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में अपना स्थान बनाए रखा.
विशेषज्ञ की दृष्टि
भारत के जनरल सिक्युरिटीज इंडस्ट्री का वृद्धि फार्मास्यूटिकल कंपनियों के लिए både अवसर और चुनौतियां प्रस्तुत करता है. जबकि यह नई बाजार और आय के स्रोत पैदा करता है, वहीं यह प्रतिस्पर्धा को बढ़ाता है और कंपनियों को अपनी रणनीतियों को फिर से सोचना पड़ता है. जैसे कि विश्व के जनरल सिक्युरिटीज बाजार अभी भी evolve कर रहा है, हमें आने वाले समय में और अधिक महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं, फार्मास्यूटिकल्स के विकास, निर्माण और बाज़ारीकरण में.
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भारत ने वैश्विक जनरल मेडिसिन बाजार पर अधिकार स्थापित किया
भारत जैसा कि अभी है, विश्व जनरल मेडिसिन बाजार में अपना प्रभाव स्थापित करता रहा है। विशेषज्ञ इस दिशा में इसके परिणामों पर मतभेद रखते हैं। कुछ लोग इसको एक बड़े उपलब्धि के रूप मानते हैं, जबकि अन्य इसके潜在 जोखिमों की चेतावनी देते हैं।
स्रोत:
भारत ने सस्ती दवाओं के ग्लोबल बाजार में 30% हिस्सेदारी प्राप्त कर लिया
मैंने सोचा कि भारत की सस्ती दवाओं के निर्यात में इतना अच्छा प्रदर्शन करना शानदार है, कहता है डॉ. रीतु जैन, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) में एक प्रमुख फार्मास्युटिकल एक्सपर्ट। "यह देश की अर्थव्यवस्था को बढ़ाने के साथ-साथ दुनिया भर में लोगों के लिए सस्ती चिकित्सा विकल्प प्रदान करता है। यह एक जीत-जीत स्थिति है" इसके अलावा, भारत की सस्ती दवाओं के निर्यात बाजार में 30% हिस्सेदारी प्राप्त कर लेने की उम्मीद है, जो देश के एक उत्पादक और उपभोक्ता के रूप में इन दवाओं की विशिष्ट स्थिति से चल रहा है।
भारत ने सस्ती दवाओं के वैश्विक बाजार में 30% हिस्सेदारी प्राप्त की
एक तरफ, दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रसिद्ध स्वास्थ्य अर्थशास्त्री डॉ. रोहन चंद्रा कह रहे हैं, "भारत की सस्ती दवाओं में सफलता स्वीकार्य है, लेकिन हमें आयात पर निर्भर रहने के जोखिम के बारे में सतर्क रहना चाहिए। हमें अपने घरेलू फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्री को强 और स्थायी बनाना चाहिए, बजाय कि निर्यात पर निर्भर रहें।" भारत को अपने 30% हिस्सेदारी में सस्ती दवाओं के वैश्विक बाजार में निर्माण करने के लिए, नीतनायकों और उद्योग नेताओं को मिलकर काम करना चाहिए ताकि देश का फार्मास्यूटिकल सेक्टर प्रतिस्पर्धी, नवीन और स्थायी रहे।
क्या आता है अगले
भारत ने ग्लोबल जनरल मेडिसिन मार्केट में 30% शेयर से अधिक की छवि प्रस्तुत कर दी है.
भारत ने सากล निर्माणी दवा बाजार में 30% हिस्सेदार के साथ सफलता प्राप्त की
भारत ने आने वाले हफ्तों और महीनों में कई महत्वपूर्ण घटनाएं देखी जाने की उम्मीद कर रहा है। भारत सरकार ने अनुसंधान और विकास में बड़ा निवेश करने की घोषणा की, जिसका焦स् innovative निर्माणी दवाओं पर होगा, जो अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स से प्रतिस्पर्धा कर सकें। इसके अलावा, उद्योग के insiders का मानना है कि यह निवेश नई उत्पाद लॉन्च और भारतीय फार्मास्यूटिकल कंपनियों और ग्लोबल प्लेयर्स के बीच साझेदारी को जन्म देगा।
भारत ने वैश्विक जनरल मेडिसिन बाजार का 30% हिस्सा हासिल कर लिया
जैन डॉक्टर के अनुसार, हम उम्मीद करते हैं कि भारतीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के बीच अधिक सहयोगात्मक साझेदारी और संयुक्त उद्यम होंगे। इससे नहीं होगा बल्कि नवीनता लाने में मदद मिलेगी और नौकरियां पैदा होंगी तथा आर्थिक वृद्धि को प्रेरित करेगी।
इस साल बाद में शेड्यूल्ड होने वाले इंडिया इंटरनेशनल फार्मास्यूटिकल्स एक्सपो (आईआईपीई) के लिए कुंजी तिथियां हैं, जिसके कारण उद्योग संवेदक नएการพัฒนา और अवसरों के लिए उत्साहित हैं।
भारत ने विश्व सामान्य दवा बाजार में ३०% हिस्सेदारी प्राप्त की है
भारत अब स्वास्थ्य क्षेत्र में दुनिया भर में अपने महत्वपूर्ण योगदान को निभाने के लिए तैयार है। हम आगे देख रहे हैं, इसलिए नीति निर्माताओं और उद्योग नेताओं को साथ मिलकर भारत के फार्मास्यूटिकल सेक्टर की प्रतिस्पर्धा, नवीनीकरण और स्थायित्व सुनिश्चित करना चाहिए। तभी हम सचमुच इस उल्लेखनीय उपलब्धि के लाभों को प्राप्त कर सकते हैं।