क्या हुआ
क्रोब्स से सुपरस्टार्स, श्रमिकों के लिए गुलामी - भारतीय मनोरंजन उद्योग में Thousands of workers are living in modern-day slavery. चौंकाने वाला है, भारतीय मनोरंजन उद्योग श्रमिकों के शोषण दर ने चौंकाने वाले स्तर पर पहुंच गया है, कई अपने शारीरिक और मानसिक कल्याण को जोखिम में डालते हुए सुपरस्टार्स बनने की उम्मीद में.
क्रोर्स से सुपरस्टार्स, श्रमिकों की गुलामी: भारत का मनोरंजन
एक हालिया सर्वेक्षण नेशनल कमिशन फॉर वुमन (एन سی डब्ल्यू) द्वारा किया गया, जिसमें फिल्म और टेलीविजन उद्योग में काम करने वाले करीब 70% श्रमिकों को लाभांश से जोड़ा गया है, जिसमें मौखिक शोषण से लेकर शारीरिक हिंसा तक है। रिपोर्ट ने लगभग 50,000 श्रमिकों की दुर्दशा हाइलाइट की, जो पृष्ठभूमि में काम कर रहे थे, अक्सर अपने काम के लिए अनपेड या कम पैसे मांग रहे थे। एन सी डब्ल्यू के निदेशक, डॉ. रंजना कुमारी के अनुसार, "उद्योग की शक्ति की गतिशीलता श्रमिकों के खिलाफ है, वे एक खेल में पawns हैं, जहां लाभांश मनुष्य अधिकारों से ऊपर है"। सर्वेक्षण ने भी पाया कि 40% श्रमिकों ने अपने सัญญा के अनुसार Longer घंटे काम किया, कई लोगों ने प्रोडक्शन के दौरान खाना या आराम नहीं किया। उल्लेखनीय उदाहरणों में एक मेकअप आर्टिस्ट है, जो 48 घंटे सीधे फिल्म सेट पर काम कर रहा था, और दूसरा एक प्रोडक्शन असिस्टैंट है, जिसने महीने में alleen ₹5,000 (लगभग $67) प्राप्त किया।
क्या इससे मायने हैं
English:
Crores to Superstars, Slavery for Workers: India's Entertain
Hindi:
क्रोर्स सुपरस्टार्स, श्रमिकों के लिए गुलामी: भारत का मनोरंजन
क्रियाकलाप में श्रमिकों की पीड़ा के पर्यावरण ने दूरगामी परिणाम उत्पन्न कर रहा है। हर सुपरस्टार जो करोड़ों कमाता है, वहीं अनेक लोग अपने घर का सामना करने में संघर्ष करते हैं। रिपोर्ट के निष्कर्ष ने मानव अधिकार कार्यकर्ताओं और श्रम संगठनों में गुस्सा पैदा कर दिया है, जो निर्माताओं और स튜디오 से अधिक जवाबदेही की मांग करते हैं। सоциोलॉजिस्ट और श्रम विशेषज्ञ, प्रोफेसर वी.के. पोला के अनुसार, "यह नहीं है केवल एक नैतिक मुद्दा, बल्कि एक आर्थिक मुद्दा भी है। जब श्रमिकों को पीड़ा होती है, तो整个 उद्योग प्रभावित होता है। हमें अपने प्राथमिकताओं को फिर से सोच लेना चाहिए और मानव श्रम की मूल्यवत्ता को पहचान लेना चाहिए।"
इसके अलावा, भारत के मनोरंजन उद्योग के श्रमिकों की पीड़ा दर (भारत के मनोरंजन उद्योग के श्रमिकों की पीड़ा दर) देश के स्वीकार्यता और सामाजिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण परिणाम उत्पन्न करती है।
विशेषज्ञ की दृष्टि
क्रोर्स से सुपरस्टार्स, श्रमिकों के लिए गुलामी: भारत का मनोरंजन
में एक्सपर्ट प्रसर्पेक्टिव
क्रोर्स से सुपरस्टार्स, श्रमिकों की गुलामी: भारत की मनोरंजन की दशा
जब ये चौंकिंदा खुलासा थम जाता है, तो विशेषज्ञ इस बात पर विचार कर रहे हैं कि इसका मतलब है भारत की मनोरंजन की उद्योग के लिए। डॉ. नलिनी राव, श्रम अधिकारों की वकील और दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर, श्रमिकों की गुलामी दर्जा पर तुरंत कार्रवाई की मांग कर रही हैं। "इन पाये हैं एक स्पष्ट चित्र कि बॉलीवुड का लालच नहीं छुपा सकता श्रमिकों के दुर्व्यवहार की सच्चाई," उसने इंटरव्यू में कहा। "हमें सिस्टमिक परिवर्तन करने चाहिए ताकि निष्पक्ष वेतन, सुरक्षित काम की स्थिति और शोषण के खिलाफ संरक्षण प्राप्त हो सके।"
लेकिन हर कोई नहीं मानता कि सख्त उपायों की जरूरत है। डॉ. रोहन जैन, भारतीय प.polytechnic, दिल्ली के मीडिया अध्ययन विशेषज्ञ, एक और समानुपातिक दृष्टिकोण रखता है। "जबकि श्रमिकों की गुलामी एक समस्या है, तो हमें सतर्क रहना चाहिए कि हमारे पास स्वीकृति न हो। मनोरंजन उद्योग एक जटिल इकोसिस्टम है जिसमें कई स्टेकहोल्डर्स हैं – हमें नहीं करना चाहिए फैसला लेने या झटके की समाधान प्रस्तावित करने कि इसके परिणाम से हमारे मदद के लिए सबसे ज्यादा लोगों को नुकसान पहुंचाए।"
क्या आता है अगले
क्रोर्स सुपरस्टार्स, श्रमिकों के लिए गुलामी: भारत का Entsretainमेंट
आने वाले हफ्तों और महीनों में, पाठकों को कई महत्वपूर्ण घटनाएं अपेक्षित हैं। भारत सरकार ने इन आरोपों की जांच का वचन दिया, जिसके परिणाम स्वरूप कानूनी सुधार और नियंत्रण किए जाएंगे जो श्रमिकों के लिए अधिकार को रोकने में मदद करेंगे। उद्योग के अंदरूनेवाले पredict एक renewed फोकस है कॉर्पोरेट सोशल रेस्पॉन्सिबिलिटी पर, जिसके तहत बड़े स्टूडियो और प्रोडक्शन हाउस लेबर कंडीशंस में सुधार और अपने श्रमिकों का समर्थन करने के लिए योजनाएं घोषित करेंगे। इसके अलावा, सर्वे के लेखकों द्वारा पूरी रिपोर्ट के जारी होने की उम्मीद है, जो श्रमिकों के लिए अधिकार के दर्जे की विस्तृत सूचनाएं प्रदान करेगी, जिसमें भारत के Entsretainमेंट उद्योग के विभिन्न सेक्टर्स में श्रमिकों के लिए अधिकार के दर्जे का विश्लेषण होगा।
भारत की मनोरंजन उद्योग के लिए एक अंधेरा हकीकत
भारत की मनोरंजन उद्योग ने इस अंधेरा हकीकत से निपटने के लिए कुछ बदलना चाहिए। भारत की मनोरंजन उद्योग में कामगारों की दुर्व्यवहार दरें एक हमारे देश की प्रतिष्ठा पर एक धमक और सामाजिक अशांति का बम हैं। अब नेताओं, उद्योग खिलाड़ियों, और उपभोक्ताओं को मिलकर बेहतर – अधिक संतुलित वेतन, सुरक्षित कार्य स्थान, और आधुनिक दासता का अंत की मांग करने का समय है। भारत की सिनेमा का भविष्य इसके ऊपर निर्भर करता है।