हिंदस्तान के डीप टेक इंडस्ट्री ने गति प्राप्त कर ली है, परंतु संबंधित चिंताएं बढ़ रही हैं कि क्षेत्र को हाइप के आधार पर स्थायी नहीं होगा। हिंदस्तान के डीप टेक इंडस्ट्री में कई चुनौतियां हैं, और नीतिनयिकों और उद्यमियों को एक अधिक समीक्षात्मक दृष्टि से स्थायी इकोसिस्टम बनाना आवश्यक है।

What Happened

भारत में स्थानीय स्टार्टअप्स के लिए कटिंग-एज टेक्नोलॉजीज जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ब्लॉकचेन और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) में निवेश की एक महत्वपूर्ण सर्ज हुई है।

रिसर्च फर्म ट्रैक्सन के अनुसार, भारत में AI-संबंधित स्टार्टअप्स ने जनवरी 2022 और जून 2023 के बीच $100 मिलियन से अधिक का फंडिंग प्राप्त किया।

हालांकि, यह निवेश का समानुपाती वृद्धि नहीं हुई है, जिसके परिणामस्वरूप स्थानीय स्टार्टअप्स के लिए मतलबी उत्पाद या सेवाएं विकसित नहीं हुई हैं।

हम अभी तक इन प्रौद्योगिकियों के लिए सुविधाजनक आवेदनों को खोजने में संघर्ष कर रहे हैं

डॉ. राकेश मोहन, आईआईटी दिल्ली में एआई पर अग्रणी विशेषज्ञ, ने कहा, "फोकस बहुत है हypes और कम है सामग्री। हमें अधिक स्पष्ट परिणाम देखने चाहिए इससे पहले कि हम कह सकें कि भारत ने सचमुच डीप टेक में महत्वपूर्ण進歩 किया है।"

भारत में इंटेलектуअल संपत्ति सुरक्षा और पेटेंट कानूनों की कमी ने इन शुरुआती कंपनियों के लंबे समय तक स्थायित्व के बारे में चिंताएं पैदा कर दीं हैं। नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर और सर्विस कंपनीज (एनएसएसकॉम) की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में केवल 12% शुरुआती कंपनियों ने पेटेंट दाखिल किए हैं, जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका में इसका संख्या अधिक है, अर्थात् 50% से अधिक है।

क्या मायने ह“

यह स्थिति के परिणाम बहुत दूरगामी ह“. यदि भारत एक सustainability Deeptech नेटवर्क नहीं बना पाता ह“, तो वह वैश्विक बाजार में अपना प्रतियोगी एज़ लॉस करेगा. इसके अलावा, अर्थव्यवस्था के मतलबी उत्पाद और सेवाएं नहीं होने से 普通 लोगों पर सीधा असर पड़ेगा, जो इन टेक्नोलॉजीज के लिए अपने दैनिक जीवन के लिए निर्भर करते ह“.

विशेषज्ञ की दृष्टि

प्रायः प्रश्न है कि इन टेक्नोलॉजीज से हम क्या समस्या हल कर रहे हैं?" रोहन वर्मा, ज़ीफर स्टार्टअप के सीईओ, कहते हैं। " अगर हम पश्चिमी समाधानों को बिना भारतीय परिस्थितियों में ढाले दोहराते हैं, तो हम लोगों के जीवन में मतलबी अंतर नहीं कर पाएंगे।" स्टेक्स उच्च हैं, और यह आवश्यक है कि नीतिज्ञ और उद्यमी मिलकर एक वातावरण बनाना चाहिए जिसमें नवाचार और वृद्धि को प्रोत्साहन दिया जाए।

भारत के डीप टेक इंडस्ट्री की सustainability पर बहस अभी तक पूरी नहीं हुई है। हमने दो विशेषज्ञों से बातचीत की, जिन्होंने मामले के बारे में विपरीत नज़रिए पेश किए। भारत के डीप टेक इंडस्ट्री की चुनौतियां हैं, लेकिन एक संरचित दृष्टिकोण से, सेक्टर अपने अड़चनों से उबर सकता है।

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राहुल खन्ना, यूनिटर फंड के सीईओ और सह-संस्थापक, ने क्षेत्र की उम्मीदें व्यक्त कीं।

"मैं सोचता हूँ कि हम एक महत्वपूर्ण संख्या में स्टार्टअप्स और निवेशकों को देख रहे हैं, जो इनोवेशन में ड्राइव कर रहे हैं, डीप टेक में।"

"सरकार की योजनाएं, जैसे स्टार्टअप इंडिया प्रोग्राम, एक ऐसा परिवेश बना दिया है, जो वृद्धि के लिए अनुकूल है।"

खन्ना के अनुसार, नीतिनामध्य और निवेशकों से लगातार समर्थन के साथ, भारतीय डीप टेक उद्योग अपने चुनौतियों से निबटने में सक्षम है।

हालांकि डॉ॰ सुरेश राघवन, एक प्रसिद्ध एआई और robotics के विशेषज्ञ, अधिक सावधान थे। "जबकि दीप्टेक की हypes देखकर अच्छा है, हमें चुनौतियों के बारे में सचेत रहना चाहिए," वह आगाह किया। "फंडिंग की कमी, सीमित प्रतिभा की कमी और नियमन की रुकावटें बस कुछ ऐसे हurdles हैं जिन्हें हल करना होगा." राघवन ने एक संरचित दृष्टिकोण की आवश्यकता पर जोर दिया।

क्या अगला है

सustainability की बातचीत जारी है, आने वाले सप्ताह और महीनों में पाठक क्या उम्मीद कर सकते हैं?

जवाब में, अगले तिमाही में कई deeptech-फोकस्ड सम्मेलन और इवेंट्स कार्यक्रम में शामिल होंगे। इन इवेंट्स ने स्टार्टअप, निवेशक और नीति-निर्धारकों को एक साथ आने का मंच प्रदान करेगा और आगे की राह पर चर्चा करेगा।

भारत में स्थायी डीप टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम का निर्माण करने की आवश्यकता

भारत सरकार के बजट घोषणा के लिए महत्वपूर्ण तिथि है, जिसका प्रभाव सेक्टर पर उम्मीद किया जाता है। Already underway कुछ और_initiatives, जिसमें हाल ही में लॉन्च की गई "AI for All" नामक AI-focused मिशन शामिल है, निवेशकों और उद्यमियों को बजट पर करीब से देख रहे हैं, क्या नई प्रोत्साहन या समर्थन मैकेनिज्म पेश किए जाते हैं।

भारत के डीप टेक इंडस्ट्री ने चुनौतियों से निपटना शुरू कर दिया, लेकिन एक स्थायी प्रणाली बनाने के लिए अधिक से अधिक हुप नहीं होगी। इसके लिए आवश्यक है कि नीतिज्ञ और उद्यमी मिलकर काम करें और नवीनता और वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए एक प्रेरक परिवेश बनाएं।

भारत के डीप टेक इंडस्ट्री चुनौतियों का समाधान निकालने के लिए आवश्यक है कि नीतिज्ञ और उद्यमी मिलकर काम करें और नवीनता और वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए एक प्रेरक परिवेश बनाएं।

भारतीय डीप टेक इंडस्ट्री के चुनौतियां संख्या में हैं, लेकिन एक अधिक संरचित दृष्टि से, क्षेत्र अपने बाधाओं से निपटने में सक्षम है। स्टेक्स उच्च हैं और यह आवश्यक है कि नीतिज्ञों और उद्यमियों ने एक अधिक विश्लेषणात्मक दृष्टि से एक मजबूत पारिस्थितिकी का निर्माण करें।

भारतीय डीप टेक इंडस्ट्री के चुनौतियां संख्या में हैं, लेकिन एक अधिक संरचित दृष्टि से, क्षेत्र अपने बाधाओं से निपटने में सक्षम है। स्टेक्स उच्च हैं और यह आवश्यक है कि नीतिज्ञों और उद्यमियों ने एक अधिक विश्लेषणात्मक दृष्टि से एक मजबूत पारिस्थितिकी का निर्माण करें।

स्थिरतापूर्ण डीप टेक्नोलॉजी क्षेत्र का निर्माण भारत में आवश्यक है

भारत में स्थिरतापूर्ण डीप टेक्नोलॉजी क्षेत्र का निर्माण करने के लिए आवश्यक है

प्रेरणा

स्थिरतापूर्ण डीप टेक्नोलॉजी क्षेत्र का निर्माण भारत में संभव है, लेकिन इसके लिए कुछ आवश्यक है। सबसे पहले हमें एक मजबूत नेटवर्क का निर्माण करना होगा, जिसमें शिक्षाविद, उद्योगपति और सरकार के प्रतिनिधि शामिल हैं। इसके अलावा, हमें नवाचारी विचारों को प्रोत्साहन देना होगा, ताकि भारत में स्थिरतापूर्ण डीप टेक्नोलॉजी क्षेत्र का निर्माण हो।

संसाधन

हमें संसाधनों के लिए भी आवश्यकता है, जिसमें पैसे, संसाधन और समय शामिल हैं। हमें इन संसाधनों को एक साथ लाना होगा, ताकि स्थिरतापूर्ण डीप टेक्नोलॉजी क्षेत्र का निर्माण हो।

नीतियां

हमें नीतियों के लिए भी आवश्यकता है, जिसमें सरकार की नीतियों, उद्योगपति की नीतियों और शिक्षाविद की नीतियों को एक साथ लाना होगा। हमें इन नीतियों को एक साथ लाना होगा, ताकि स्थिरतापूर्ण डीप टेक्नोलॉजी क्षेत्र का निर्माण हो।

स्थिति

भारत में स्थिरतापूर्ण डीप टेक्नोलॉजी क्षेत्र का निर्माण करने के लिए हमें एक मजबूत स्थिति की आवश्यकता है। हमें एक स्थिति का निर्माण करना होगा, जिसमें संसाधनों, पैसे, संसाधन और समय शामिल हैं।