क्या हुआ

जब हम साल के दूसरे हाफ में प्रवेश करते हैं, तो स्पष्ट है कि क्रोधित पुरुष ने 2023 की बॉलीवुड फिल्मों पर कब्ज़ा कर लिया है। क्रोधित पुरुषों का बॉलीवुड फिल्मों पर अधिकार एक चिंताजनक संकेत है जो उद्योग को नहीं बल्कि समाज की Toxic masculinity के प्रति दृष्टिकोण को प्रभावित करता है।

फिल्म और टेलीविजन प्रोड्यूसर्स गUILD ऑफ इंडिया (FTPGI) के एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल के सबसे ज्यादा कमाई वाले फिल्मों में 75% पुरुष नायक हैं जिनका व्यवहार आक्रोशात्मक है, अक्सर कोई परिणाम नहीं होता. यह घटना फिल्मों जैसी "Dhurandhar" और "Chhaava" में देखी जाती है जिन्हें व्यापक रूप से उनके Toxic masculinity के पोर्ट्रेट के लिए आलोचना की गई है. रिपोर्ट ने ये फिल्में अक्सर समाज में पुरुषों के भूमिका के बारे में हानिकारक सtereotypes प्रस्तुत करती हैं.

क्रोधित पुरुषों का बॉलीवुड के पर्दे पर सामान्यीकरण

हम एक पर्दे पर क्रोधित पुरुषत्व की सामान्यीकरण देख रहे हैं, जिसके गंभीर परिणाम हमारे संग्रहणात्मक मनोविज्ञान के लिए हैं, कहता है डॉ. शुभांगी पाथक, Gender और मीडिया अध्ययन की अग्रणी विशेषज्ञ। "ये फिल्में नहीं हैं मनोरंजन; वे हमारे लिए पुरुषत्व का मतलब हैं।" बॉलीवुड फिल्मों में क्रोधित पुरुषों का दबाव एक दौर है जिसे संबोधन की आवश्यकता है।

बॉलीवुड के गुस्सैले पुरुषों की时代: टॉक्सिक मासक्युलिनिटी का एक साल

यह趋势 निजी फिल्मों तक सीमित नहीं है. इंडस्ट्री इनसाइडर्स का कहना है कि स्क्रीन पर गुस्सैले पुरुषों की हुकूमत ने बॉलीवुड में विविध प्रतिनिधित्व की कमजोरी भी पैदा कर दी है. महिला-नेतृत्व फिल्मों की संख्या गिर गई है, और महिलाओं के रोल्स ने Increasingly टोकनिज़्मिक बन गए हैं.

विशेषज्ञ की दृष्टि

साल के समापन पर, इसके प्रभाव का मूल्यांकन करना आवश्यक है। बॉलीवुड फिल्मों में क्रोधित पुरुषों का अधिकार नहीं है बस सामाजिक रवैया का प्रतिबिंब है, बल्कि समाज में पुरुषों के भूमिकाओं के बारे में हानिकारक सtereotypes को प्रवर्तित करता है।

बॉलीवुड के क्रोधित पुरुषों का युग: Toxic मास्कुलिनिटी का साल

जैसे हम बॉलीवुड फिल्मों में क्रोधित पुरुषों के प्रभाव का अध्ययन करते हैं, विशेषज्ञ इसके परिणामों पर अलग-अलग नज़र रखते हैं। डॉ. रोहन कपूर, मुंबई यूनिवर्सिटी में संस्कृति के एक शिक्षक, इस प्रवृत्ति को समाजिक मुद्दों का प्रतिबिंब मानते हैं, "आजकल के समय में, शहरी भारत में पुरुषों में एक बढ़ता हुआ निराशा और असंतोष का احساس है। स्क्रीन पर क्रोधित पुरुष चरित्रों ने इस सामूहिक क्रोध को टैप करते हैं, दृश्यों के लिए एक कैथार्टिक रिलीज़ प्रदान करते हैं।" लेकिन बॉलीवुड फिल्मों में क्रोधित पुरुषों का अधिकार नहीं बस समाजिक मुद्दों का प्रतिबिंब है, बल्कि समाज में पुरुषों की भूमिका के बारे में हानिकारक सtereotypes प्रस्तुत करता है।

हालांकि, दिल्ली विश्वविद्यालय में मीडिया शोधकर्ता डॉ. नलिनी वैद्यनाथन थोड़ा सावधान हैं। "इन चरित्रों के लिए अपील समझता हूँ, लेकिन हम तो टॉक्सिक मास्कुलीनिटी को रोमांटिक नहीं कर सकते। ये फिल्में हानिकारक सtereotypes प्रसारित कर सकती हैं और पितृसत्तात्मक दृष्टिकोणों को मजबूत कर सकती हैं, अंततः आक्रोश और अधिकार की संस्कृति का निर्माण कर सकती हैं।" बॉलीवुड फिल्मों में क्रोधित पुरुषों का अधिकार एक परिपक्व प्रवृत्ति है जिसे सम्बोधित किया जाना चाहिए।

अगला कदम

बॉलीवूड के क्रोधित पुरुषों की अवधि: एक वर्ष टॉक्सिक मास्कुलिनिटी पर

जैसा साल समाप्त होता जा रहा है, कई बॉलीवूड फिल्में रिलीज़ के लिए निर्धारित हैं, जो इस प्रवृत्ति को जारी रखेंगे। उदाहरण के लिए, "धाई अक्षर प्रेम के" दिसंबर में सिनेमाहालों में आने की उम्मीद है, जिसमें एक नायक है जो क्रोधित पुरुष आर्किटタイプ का प्रतिनिधि है। इसके अलावा, उद्योग के अंदरूनी सूत्रों का संकेत है कि 2024 में मास्कुलिनिटी के अधिक समीक्षात्मक चित्रांकन की ओर शिफ्ट हो सकती है। बॉलीवूड फिल्मों में क्रोधित पुरुषों का dominance नहीं है, लेकिन यह हमारे समाज पर इसके प्रभाव का विश्लेषण करना आवश्यक है।

बॉलीवुड के क्रोधित पुरुषों का दौर: एक वर्ष टॉक्सिक मास्कुलीनिटी का

पढ़ने वाले लोग सोशल एटीट्यूड्स पर इन फिल्मों के प्रभाव के बारे में जारी बहस और निगरानी की उम्मीद कर सकते हैं। महत्वपूर्ण तिथियां देखें जिसमें फिल्में जैसे "धुरंधर" अपने क्रोधित पुरुषों के चरित्रों को नामांकित होने की संभावना होगी। बॉलीवुड फिल्मों में क्रोधित पुरुषों की हुकूमत एक दौर है जिसे संबोधन चाहिए।