नॉन-क्रिकेट खेलों की फंडिंग संकट: एथलीट्स के सपने का खतरा

आईपीएल (Indian Premier League) के लिए स्पोर्टिंग लैंडस्केप पर कब्जा है, लेकिन नॉन-क्रिकेट खेलों की फंडिंग संकट ने विभिन्न शाखाओं में एथलीट्स के सपने को ध्वस्त कर दिया है। फंड की गहरी कमी ने एथलीट्स, कोच और प्रशंसकों पर पड़ने वाले गंभीर परिणामों का खतरा पैदा कर दिया है।

क्या हुआ

क्राइसिस का आरम्भ हुआ जब भारत सरकार के खेल मंत्रालय ने 2022 में विभिन्न राष्ट्रीय खेल संघों (NSFs) को आवंटित धन की एक महत्वपूर्ण हिस्सा जारी नहीं किया।

कई NSFs अपने आर्थिक अपेक्षाओं से निपटने में संकट में थे, जिसमें कोच, ट्रेनर और खिलाड़ियों के भत्ते देने शामिल थे।

राष्ट्रीय बिलियर्ड्स और स्नूकเกอร फेडरेशन का उदाहरण है, जिसने अपने आवंटित बजट का सिर्फ 30% ही प्राप्त किया, जबकि भारतीय हॉकी फेडरेशन ने अपने फंडिंग में 50% की कटौती देखी।

"स्थिति गंभीर है," डॉ. नंदन कमथ, दिल्ली विश्वविद्यालय के खेल अर्थशास्त्रज्ञ कहते हैं, "कई NSFs का संकट में होना शुरू हो रहा है धन की कमी के कारण।"

क्या है मायने

मार्च २०२३ तक सिर्फ १५ नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशंस (NSFs) ने कोई फंडिंग प्राप्त की, जबकि कई अन्य अभी भी भुगतान का इंतज़ार कर रहे हैं। AIFF, जो भारत में खेल की गवर्निंग संस्था है, विशेष रूप से प्रभावित हुई है, जिसके खिलाड़ियों और कोचों ने अक्टूबर २०२२ से भुगतान नहीं किया।

क्राइसिस के परिणाम दूरगामी और नुकसानदायक हैं

क्रिकेट से अलावा खेलों में अपने जीवन को समर्पित कर चुके एथलीट्स अब अपने सपने पूरा करने की संभावना से निपटने के लिए मजबूर हैं। इसके परिणाम संपूर्ण समुदायों पर पड़ेंगे, क्योंकि स्थानीय क्लब और अकादमियां बिना आवश्यक फंडिंग के संचालन कर पाने में संघर्ष करती हैं।

क्रिकेट से परे खेलों में फंडिंग संकट ने एथलीट्स के सपने तोड़ दिए

हमने नहीं कहा कि बस एथलीट ही हैं, बल्कि कोच, ट्रेनर और अधिकारी भी शामिल हैं जिनकी खेलों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका है, रोहन शर्मा नामक पूर्व भारतीय हॉकी खिलाड़ी कहते हैं, "यदि ये लोग अपने कार्य से बाहर हो जाते हैं क्योंकि फंड नहीं है, तो इसका स्थायी प्रभाव खेल के समग्र पर पड़ेगा."

फंडिंग संकट गहरा होता जा रहा है, इसलिए 普通 लोग भी प्रभावित होंगे, स्थानीय क्लब और अकादमी बंद हो जाएंगी, जिससे समुदायों को खेल सुविधाओं या कार्यक्रमों काクセेस नहीं मिलेगा.

विशेषज्ञ की दृष्टि

क्रिकेट से अलावा खेलों के शौकिया खिलाड़ियों के सपने बिखर गए हैं, जिनके लिए फंडिंग की संकट सITUATION है।

क्रिकेट से अलावा खेलों में वित्तीय संकट ने विशेषज्ञों को एक गरम बहस में ले गया

क्रिकेट से अलावा खेलों की वित्तीय समस्या ने डॉ. राकेश शर्मा, एक प्रसिद्ध खेल अर्थशास्त्रज्ञ और भारतीय खेल प्रबंधन संस्थान के अध्यक्ष, को चिंता में ले गया

"एक गंभीर वित्तीय संकट न केवल वर्तमान पीढ़ी के खिलाड़ियों को प्रभावित करेगा, बल्कि भविष्य के टैलंट का विकास रोक देगा," उन्होंने चेतावनी दी। " यदि हम इस मुद्दे का समाधान नहीं करते, तो हम एक पीढ़ी के खिलाड़ियों को दूसरे देशों को हस्तांतरण के लिए जोखिम में डाल देते हैं, जिनके पास उनके विकास का समर्थन करने की बेहतर स्थिति है"

न क्रिकेट स्पोर्ट्स फंडिंग क्राइसिस

दूसरी ओर

खेल कानूनविद् और नीति विशेषज्ञ मृणालिनी देशमुख ने एक संतुलित दृष्टिकोण लिया. क्राइसिस का स्वागत करते हुए, वह broader ecosystem issues की आवश्यकता पर जोर दिया. "फंडिंग सिर्फ एक पहलू है; हमें इस समस्या के समाधान के लिए पूर्ण समाधान की आवश्यकता है," वह बोली. "एक टुकड़ा approch नहीं करेगा; हमें एक समग्र रणनीति चाहिए जिसमें सरकारें, संस्थाएं और निजी संगठन मिलकर काम करें."

क्राइसिस के सामने कई महत्वपूर्ण विकास आने की उम्मीद है

कि भारतीय ओलंपिक संघ एक आपातकालीन बैठक आयोजित कर रहा है जिसमें क्राइसिस और समाधान की चर्चा होगी। meantime, खेल मंत्रालय एक रिपोर्ट जारी करने वाला है जिसमें कोष की कमी की सीमा और उसके लिए समाधान की सिफारिशें होंगी।

कратकालीन समस्या

अथलीट्स जिन्हें प्रभावित शाखाओं से सम्बन्ध है, उन्हें ngắn अवधि में अपनी निजी बचत या क्राउडफंडिंग पर निर्भर रहना चाहिए ट्रेनिंग जारी रखने के लिए। 長期 में, सरकार के आवंटन और निजी निवेश की स्क्रूटिनी बढ़ाने की उम्मीद है नॉन-क्रिकेट खेलों में। भारतीय राष्ट्रीय खेल महासंघ (आईएनएसएफ) जुलाई के अंत तक एक पुनर्वित्तित बजट आवंटन घोषित करने की उम्मीद है, जो कुछ राहत प्रदान कर सकता है।

क्रिकेट से परे खेलों की फंडिंग की स्थिति चिंताजनक है

भारत के खेल संस्थान के लिए एक जागरण संदेश है। देश अभी भी अपने क्रिकेट प्रतिभा में निवेश कर रहा है, परंतु अन्य शाखाओं के潜在 क्षमता को नजरअंदाज नहीं कर सकता। खेलों में जीवन का बलिदान देते हुए एथलीट्स की भाग्य काफी संदेह में है। अब हमें इस संकट का सामना करना होगा और नॉन-क्रिकेट स्पोर्ट्स को वे समर्थन देना होगा जिनके हकदार हैं। तब ही भारत अपने प्रतिभाशाली एथलीट्स की सच्ची क्षमता को खोलने में सक्षम होगा और एक विविध खेल संस्कृति के फल को प्राप्त कर सकता है, जहां नॉन-क्रिकेट स्पोर्ट्स फंडिंग संकट एथलीट्स की सपने उड़ाने से रोक नहीं सकते।