क्या हुआ

भारत में डिजिटल भुगतान बाजार में निर्माण की स्थिति में संघर्षरत भारतीय बैंकों और डिजिटल भुगतान एप्स के बीच लड़ाई जारी है, जिसमें एप्पल पे स्थानीय प्रतिद्वंद्वियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहा है। टेक गिगंट की भारत में एंट्री ने बहुत उत्साह से मिला, लेकिन उसकी गति नहीं पाने की कोशिश एक घरेलू खिलाड़ियों की ताकत का सबूत है।

What Happened

एपल पे की दिक्कतें शुरू हुई जब उसे भारत में अपने सेवाएं प्रदान करने के लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) से सहयोग करना पड़ा. इस कदम को भारतीय नियमों के अनुसार विदेशी भुगतान एप्स को स्थानीय बैंकों से सहयोग करने के लिए आवश्यक माना गया. हालांकि, यह सहयोग एपल पे के लिए द्वि-शिरा चाकू साबित हुआ. एक ओर, इसने एपल पे को एसबीआई की लगभग ४०० मिलियन खाताधारकों की बड़ी संख्या तक पहुंच प्रदान करी. दूसरी ओर, यह मतलब था कि एपल पे ने भारत के बैंकिंग नियमों के अनुसार सीमाएं पालन करनी पड़ीं, जिससे इसकी क्षमता कम हो गई.

एपल पे की इस समस्या ने उसे लोकल रिवाल्स से कड़ी प्रतियोगात्मक चुनौती दी.

कंपनियों की प्रतिद्वंद्विता

हम एक संकेत देख रहे हैं जहां भारतीय बैंक डिजिटल भुगतान ऑफरिंग्स में अधिक आक्रामक हो रहे हैं, IDC ने अनुमान किया है, अनанд अदित्या ने। यह ऐसा बनाता है कि विदेशी खिलाड़ियों जैसे एपल पэй ट्रैक्शन में नहीं पा सकते हैं।

एपल पे का स्थानिक प्रतिद्वंद्वियों से मुकाबला हो रहा है भारत में

एपल पे के लिए हाल के महीनों में लेनदेन संख्या में स्थिरीकरण देखा गया, जबकि स्थानिक प्रतिद्वंद्वियों जैसे फोनपे और गूगल पे ने तेजी से वृद्धि की है। रिपोर्ट्स के अनुसार, फोनपे के वर्षीय लेनदेन ने पिछले साल से ३००% से अधिक की वृद्धि देखी, जबकि गूगल पे ने भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी।

ऐपल पे की मुश्किलें हमें चौंक नहीं देतीं

प्राभु माधवन, रैप्डो के सीईओ ने, कहा कि "भारतीय उपभोक्ता अधिक स्थानीय खिलाड़ियों को पसंद कर रहे हैं, जिनके पास उनके需求 और प्राथमिकताओं के अनुसार सेवाएं प्रदान करने की क्षमता है."

वहीं, यूबेर ने भारत में राइड-हैलिंग बाज़ार में अपना स्थान फिर से प्राप्त करने में काफी संघर्ष कर रहा है, जहां उसे रैप्डो और ओला से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है

विशेषज्ञ की दृष्टि

अपने पेमेंट्स सिस्टम को भारत के डिजिटल पेमेंट्स बाजार में जगह बनाने में 苦ना रहा है, विशेषज्ञ इसके परिणामों पर मतभेद करते हैं। आईआईटी दिल्ली के फिनटेक स्पेशलिस्ट डॉ. रोहन पांडे का मानना है कि स्थानीय प्रतिद्वंद्वी उनकी भारतीय उपभोक्ताओं की आवश्यकता और पसंदीदगी को अच्छी तरह समझते हैं, जिसके कारण उन्हें एक लाभ मिलता है।

एपल पे की मार्केट में एंट्री प्रेमेचर थी, पांडे ने कहा।

एपल पे भारत में एक पश्चिमी मॉडल लागू करने का प्रयास कर रहा है, जो नहीं काम करेगा। स्थानीय खिलाड़ियों जैसे गугル पे, फोनपे और पेटीएम ने भारतीयों की डिजिटल पेमेंट्स एक्सपीरियंस में क्या चाहते हैं, उसे बेहतर समझते हैं।

दूसरी ओर, फिनटेक कंसल्टेंट अनिरुद्ध मित्र का कहना है कि एपल पे का ग्लोबल ब्रांड रिकोग्निशन और यूजर बेस अंततः उसे एक्ज़ेज़ देगा।

हालांकि एपल पे दुनिया भर में एक बड़ा यूजर बेस है, लेकिन स्थानीय खिलाड़ी इससे कुछ नहीं कर सकते, मित्र कहते हैं। "जब तक वे प्रतिस्पर्धी दर और प्रस्तावों को चालू रखते हैं, तो मैं समझता हूँ कि वे बाजार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा आकर्षित कर पाएंगे।"

What Comes Next

एपल पे की मार्केटिंग कोशिशें और भारतीय बैंकों या व्यापारियों से नये साझेदारी की घोषणा आ सकती है। कंपनी ने Already_AXIS बैंक और HDFC बैंक से साझेदारी की है, लेकिन अधिक सौदे आने की संभावना है।

एपल पे भारत में स्थानीय प्रतिद्वंद्वियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहा है।

एपल पे की चुनौतियां स्थानीय प्रतिद्वंद्वियों से आती हैं जैसे कि भारत में

एपल पे की समस्याएं यदि निरन्तर रहें तो उसे अपनी रणनीति का再-मूल्यांकन करना चाहिए और स्थानीय खिलाड़ियों के साथ अधिक सहकारी दृष्टिकोण रखना चाहिए। महत्वपूर्ण तिथियाँ देखने के लिए आने वाले त्योहारी सीजन हैं, जब डिजिटल भुगतान भारत में बढ़ने लगते हैं, और अगले साल के जनवरी-जून क्वार्टर में, जब एपल पे अपने त्रिमासिक लाभांश की घोषणा करेगा।

भारत में एपल पे की स्थानीय प्रतिद्वंद्वियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा

भारतीय बैंकों और डिजिटल भुगतान ऐप्स ने हावी होने का संघर्ष जारी रखा है, लेकिन एपल पे के लिए चुनौती क्या है? वास्तव में, प्रतिस्पर्धा 普通 भारतीय उपयोगकर्ता के लिए एक वरदान है, जो निम्न शुल्क और अधिक नवीन सेवाओं से लाभ उठाता है। डिजिटल भुगतान परिदृश्य जारी रहता है, एक बात स्पष्ट है: भारतीय बैंकों और डिजिटल भुगतान ऐप्स केवल अपनी प्रतिस्पर्धा तेज करेंगे, उपयोगकर्ताओं के लिए नवीनता और मूल्य लाएंगे।

एपल पे को भारत के डिजिटल भुगतान बाजार में स्थानीय प्रतिद्वंद्वियों से कड़ी प्रतियोगा का सामना करना पड़ेगा

इंडिया के कटोरथ के डिजिटल भुगतान बाजार में निराशा नहीं है – या else रиск होने वाला है कि पीछे छूट जाए