क्या हुआ

भारत के आवश्यक दवाओं की सूचा 2015 से अपरिवर्तित है, स्वास्थ्य कार्यकर्ता प्राइस कैप और उपलब्धता को सुनिश्चित करने के लिए एक संशोधन की मांग कर रहे हैं। देश की आवश्यक दवाओं की सूची एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है जिसमें हर मरीज के लिएccessible सबसे महत्वपूर्ण नुस्खे शामिल हैं। भारत में 1.3 अरब से अधिक लोग रहते हैं, इन जीवन-रक्षा दवाओं के सस्ते एक्सेस सुनिश्चित करना आवश्यक है।

What Happened

भारत सरकार के आवश्यक दवाओं की सूचा 2015 में última बार संशोधित हुई थी, और तब से, कई आवश्यक दवाओं के दामों में एक महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, आवश्यक दवाओं जैसे एंटीबायोटिक्स, पेनकिलर्स और एंटीहिस्टमिन्स के दाम 300% तक बढ़े हैं, पिछले कुछ सालों में। इस कठिन चढ़ाई ने मरीज़ों के लिए इन महत्वपूर्ण दवाओं कोクセस करना Increasingly कठिन बना दिया है, विशेषकर रूरल एरियाज़ जहां स्वास्थ्य सुविधाएं पहले सीमित थीं।

लक्ष्य के बिना भारत के आवश्यक दवाइयों की सूची में संशोधन की कमी है, जिसके परिणाम प्रभावित रोगियों के लिए गंभीर हैं, जिनके अस्तित्व के लिए इन दवाइयों पर निर्भर करते हैं। उदाहरण के लिए, एक रोगी जो चिकनी दर्द से पीड़ित है, उसे अपनी आवश्यक दवा नहीं खरीद पाता, जिसके परिणाम एक जीवन भर की अग्नि और पीड़ा है। इसके अलावा, आवश्यक दवाइयों के बढ़ते मूल्य ने रोगियों के लिए बाहर से भुगतान का उदय कर दिया है, जिसके परिणाम कई परिवारों के लिए आर्थिक नाश हो सकता है।

क्या इसके महत्व

भारत के आवश्यक दवाओं की सूची सभी लोगों को जीवन-रक्षा चिकित्सा की पहुँच सुनिश्चित करती है। लेकिन वर्तमान स्थिति ideals से दूर है, आवश्यक दवाओं पर मूल्य निर्धारा नहीं कर पाता है कि सभी को सस्ती चिकित्सा पहुँच हो। "भारत के आवश्यक दवाओं पर मूल्य निर्धारा था कि सभी लोगों को जीवन-रक्षा चिकित्सा की पहुँच होनी चाहिए," कहा डॉ. रोहन मेह्रा, सस्ती चिकित्सा के प्रसिद्ध विशेषज्ञ और प्रवक्ता। "लेकिन वर्तमान स्थिति ideals से दूर है।"

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भारत के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण विषय है - निर्धारित मूल्य पर भारत की आवश्यक दवाएं

विशेषज्ञ नज़रिए

स्वास्थ्य सेवा की बहस में तेजी आते हुए

देश की आवश्यक दवाओं की सूची के प्रस्तावित संशोधन पर विशेषज्ञ अपने मत दे रहे हैं। डॉ. रुक्मिनी राव, दिल्ली विश्वविद्यालय की एक प्रोफेसर और स्वास्थ्य अर्थशास्त्री हैं, जो निश्चित है कि मूल्य सीमाएं आवश्यक हैं ताकि पहुँच योग्यता सुनिश्चित हो। "वर्तमान सистемा फार्मास्यूटिकल कम्पनियों को इन जीवन-रक्षा दवाओं के लिए असमान मूल्य निर्धारित करने की अनुमति देती है, जिसका प्रभाव सबसे निचले आय वाले रोगियों पर असमान रूप से पड़ता है," वह कहीं। "एक संशोधित सूची में मूल्य सीमाएं होंगी, तो हर किसी को इन आवश्यक दवाओं का पहुँच होगा, चाहे उसका समाजिक-आर्थिक स्थिति क्या हो।"

हालांकि, डॉ॰ विक्रम जैन, एक प्रसिद्ध फार्मास्यूटिकल और भारतीय फार्मास्यूटिकल संस्था के उपाध्यक्ष, अधिक सावधान हैं। "प्राइसिंग के बारे में चिंताएं समझ में आती हैं, लेकिन हमें नवीनीकरण और शोध पर भी विचार करना चाहिए," वह अलर्ट किया। "कीमतों को सख्त रूप से सीमित कर्ना नई दवाओं के विकास को अवरुद्ध कर सकता है, जिससे लंबे समय में मरीजों को नुकसान पहुंचता है।"

क्या अगला है

स्वास्थ्य कार्यकर्ता आवश्यक दवाओं के लिए पुनर्विचार की मांग जारी रखते हैं, आने वाले हफ्तों में कई महत्वपूर्ण मीलपστοन घटनाक्रम होने की उम्मीद है। भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय Essential Medicines List के मुद्दे पर एक श्रृंखला पब्लिक कंसल्टेशन्स आयोजित करेगा, तिथि अभी तक घोषित नहीं हुई है। meantime, स्वास्थ्य समिति संसद ने इस मामले की जांच शुरू कर देगी, अगले दो महीनों के भीतर।

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भारत के आवश्यक दवाओं की कीमत निर्धारित करें

भारत में अल्पकालिक, कार्यकर्ता एक राष्ट्रीय जागरूकता अभियान चलाएंगे, जिसमें सभाएं और प्रदर्शन शामिल होंगे ताकि सरकार पर दबाव बनाया जाए कि सूची में बदलाव करे। जब बहस गरम होगी, तो फार्मास्यूटिकल कंपनियां अपने हितों की रक्षा के लिए लobbies के प्रयास बढ़ाएंगी। महत्वपूर्ण निर्णय आ रहे हैं, एक बात Certain है: भारत के आवश्यक दवाओं की सूची का प्रभाव सार्वजनिक स्वास्थ्य पर बहुत दूरगामी होगा।

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